Wednesday, August 21, 2019

881


चित्रांकन; प्रीति अग्रवाल
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
1
सांध्य गगन
या उतरा आँगन
कुसुमित यौवन,
रूप तुम्हारा
बहता छल-छल
ज्यों निर्झर चंचल।
2
अधर खिले
पिया मदिर मधु
जगे जड़-चेतन,
अँगड़ाई ले
बहा मन्द पवन
सिंचित तन-मन।
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Thursday, August 15, 2019

880


कमला निखुर्पा

ढूँढे बहिन
भैया की कलाइयाँ
नेह की डोर 
बाँधती चहूँ ओर
छूटा पीहर 
बसा भाई विदेश 
सूना है देश 
आओ घटा पुकारे 
राह निहारे 
गाँव की ये गलियाँ 
नीम की छैयाँ
गर्म चूल्हे की रोटी 
गागर-जल 
आँगन की गौरैया 
बहना तेरी 
लगे सबसे न्यारी 
सोनचिरैया 
पुकारे भैया-भैया !!
सज-धजके
रँगी चूनर लहरा
घर भर में
पैंजनिया छनका 
बिजुरी बन 
चित्र;गूगल से साभार
ले हाथों में आरती 
रोली-तिलक
माथे लगा अक्षत 
भाई दुलारे 
डबडबाए नैन 
छलक जाए  
पाके एक झलक
जिए युगों तलक !!!
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Wednesday, August 14, 2019

879

पुष्पा मेहरा  
1
मस्तक टीका
कलाई में रक्षा –सूत्र
प्यार–सौगात
आस –विश्वास बीच
टिका, भाई का प्यार |
2
आँधी-तूफ़ान
बाढ़ बीच बहना
राखी ले हाथ
कहें,शूरों को धन्य
बने शौर्य-प्रतीक
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Saturday, August 3, 2019

878


डॉoसुधा गुप्ता
1
चित ; ज्योत्स्ना प्रदीप की माताश्री
बाँस की पोरी
निकम्मी खोखल मैं
बेसुरी, कोरी
तूने फूँक जो भरी
बन गई बाँसुरी
2
तेरा ही जादू
दूध पीना भूला है
गैया का छौना
चित्र-से मोर, शुक
कैसा ये किया टोना


3
मिली झलक
लगी नहीं पलक
रूप सलोना
श्याम ने किया टोना
राधिका भूली सोना
4
बाँस कि पोरी
बनी रे मुरलिका
श्याम दीवानी
राधिका रो-रो मरे
चुराए, छिपा धरे
5
कान्हा क्या गए
राधा हुई बावरी
कैसी विकल
सदा गीला आँचल
सूखे न किसी पल
6
ज्वर से तपे
जंगल के पैताने
आ बैठी धूप
प्यासा बेचैन रोगी
दो बूँद पानी नहीं।
7
अपने भार
झुका हरसिंगार
फूलों का बोझ
उठाए नहीं बने
खिले इतने घने
8
पाँत में खड़े
गुलमोहर सजे
हरी पोशाक
चोटी में गूँथे फूल
छात्राएँ चलीं स्कूल
9
सुन रे बच्चे
सपने तेरे बड़े
नयन छोटे
आकाश तेरा घर
ले उड़ान जीभर
10
सुख का साथी
घर-परिवार
दु:ख का साथी
सिर्फ़ अकेलापन
किसे खोजे पागल
11
अकेली चली
दु:खों के दरिया में
आँसू की कश्ती
खुद ही मँझधार
खुद ही पतवार
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