Monday, July 29, 2019

877


सेदोका
सुदर्शन रत्नाकर
1
मोती बिखरे
जल-चादर पर
बिछा किरण-जाल
उगता सूर्य
करता आलिंगन
सागर उर्मि साथ।
2
तपती धरा
खग हुए व्याकुल
ढूँढें शीतल छाया
झुलसे पंख
किसे बताएँ दु:ख
नहीं पेड़ों का संग।
3
चलती जब
महकता आँगन
खिलते गुलमोहर
फैली चाँदनी
जब बेटी मुस्काई
जैसे बहार आई।।
4
आता तूफ़ान
टूट जातीं शाखाएँ
पीले पत्ते झरते
बच जाते वो
झुकते जो सामने
हरे पात न टूटे।
-0-ई-29,नेहरू ग्राउण्ड,फरीदाबाद-121001
-0-
ताँका
2-सविता अग्रवाल सवि (कैनेडा)
1
ठोकर खाई
उठी,सँभली,चली
फिर जा गिरी
सिलसिला यूँ चला
उम्र निकल ग
2
सुगंध फ़ैली
तितलियाँ मचलीं
बगिया खिली
पराग पीने आ
भ्रमर -टोली
3
सावन ऋतु
हरी डूब मुस्काई
फुहारें लाई
संग मिल सखियाँ
तीजो के गीत गाएँ
4
प्रातः की बेला
पक्षियों की चहक
मन प्रसन्न
सूर्य-किरण आई
उषा-वधू लजाई
-0-
दूरभाष : (905) 671 8707  


Thursday, July 25, 2019

876


कमला निखुर्पा
1-चाहत मेरी
1
चाहत मेरी-
बूँद बन टपकूँ
मोती न बनूँ
पपीहे के कंठ की
सदा प्यास बुझाऊँ।
2
चाहत मेरी-
कस्तूरी मृग बन
छुप के रहूँ
महकाऊँ जो यादें
खोजें धरा-गगन ।
3
पावन हुई
वैदिक ऋचाओं -सी
जीवन -यज्ञ
समिधा बन जली
पूर्णाहुति दे चली ।
4
लो आई हवा
लेके तेरा संदेशा
रोए जो तुम
भीगा मेरा आँचल
गुमसुम मौसम ।
-0-




2- ओ री बरखा - कमला निखुर्पा

ओ री बरखा
चले जो तेरा चर्खा
बिखरी रुई
भरा है आसमान
बूँदों के धागे
जमी पे हैं बिखरे ।
भीजती धरा
उड़े तरु अँचरा
हँसी चपला
धर हाथ मुँह पे ।
सहमे तृण
पात -पात कंपित
बौराया वट
बूँदों की खटपट
डोला पीपल
हवा की हलचल
डबडबाई
तलैया की अँखियाँ
आया सावन
झूलीं सब सखियाँ
आओ बरखा !
चलाओ तुम चर्खा
गाएँ सखियाँ
रिमझिम की तान
झूमे सारा जहान ।
-0-21 जुलाई 2019
 -0-कमला निखुर्पा
प्राचार्या, केन्द्रीय विद्यालय पिथौरागढ़ ,पोस्ट ऑफिस – भरकटिया
(उत्तराखंड )पिन 262520

Saturday, July 20, 2019

875-माहिया के दो रंग


4-पूनम सैनी
1-रोशन मुझसे घर है
1
तुम चाँद चकोरी हो।
जगमग जगती हो,
चंदा- सी गोरी हो।
2
सच देखो ये गर है-
बिल बिजली का दो,
रोशन मुझसे घर है।
3
झाँझर घड़वादो ना;
कितनी कोरी है,
चूनर रँगवादो ना।
4
क्या नाच दिखाओगी?
पागल पहले हो,
जोकर बन जाओगी।
-0-
2-हर सीमा  कहती है-
1
जननी है वीरों की
भारत की धरती
माता रणधीरों की
2
पावन ये धरती है 
प्रेम -भरी देखो
मन हर्षित करती है।
3
पैरों में छाले हैं
सरहद के फिर भी 
सैनिक रखवाले हैं।
4
हर सीमा  कहती है-
रग में वीरों की
ज्वाला ही बहती है
5
वीरों का क्या कहना 1
डोरी फाँसी की
इनका प्यारा गहना।
-0-

Thursday, July 18, 2019

874


शशि पाधा
1
चुप थी मैं भी
और मौन तुम भी
तुम्हारा स्पर्श
कुछ पिघला गया
मौन मुखर हुआ।
2
मेघा गरजे
गाने लगी बदली
राग  मल्हार
शाख- शाख पी रही
रिमझिम  फुहार।
3
आज भोर ने
घबराते-लजाते
ओढ़ ली धूप
मौसम गुनगुनाया
स्वर्ण सौगात लाया ।
4
शांत झील में
तैरना चाँदनी का
या कोई गीत
पहाड़ में गूँजना
सौन्दर्य-इन्द्रजाल।
 5
रहूँ ,न रहूँ
फर्क नहीं पड़ता
क्या किया मैंने
वही है मेरा नाम
वही पहचान भी।
-0-

Tuesday, July 9, 2019

873-रे निर्मोही बादल !


सुदर्शन रत्नाकर

बिन बरसे
कहाँ जाते हो तुम
बरस भी लो
आए हो तो बादल,
राह निहारे
तपस्वी पपीहरा
प्यास बुझे
व्याकुल पेड़ खड़े
जल -विहीन
सूख रहे हैं सब
ताल- तलैया
आसमान देखता
कृषकाय वो
बिलखती संतान
नहीं अनाज
मिलने को आतुर
तेरी बूँदों से
समन्दर का पानी,
तरस रहे
उपवन -बगिया
बरसो अब
रे निर्मोही बादल !
बिन नीर के
प्यासी -प्यासी है धरा
प्यासा जनमानस।

-0- 

Saturday, July 6, 2019

872


1-वर्षा
डॉ जेन्नी शबनम
1
तपती धरा
तन भी तप उठा
बदरा छाए
घूम -घूम गरजे
मन का भौंरा नाचे।
2.
कूकी कोयल
नाचे है पपीहरा
देख बदरा
चहके है बगिया
नाचे घर अँगना।
3.
ओ रे बदरा
कितना तड़पाया
अब तू माना
तेरे बिना अटकी
संसार की मटकी।
4.
गाए मल्हार
घनघोर घटाएँ
नभ मुस्काए
बूँदें खूब झरती
रिमझिम फुहार।
5.
बरसा पानी
याद आई है नानी
है अस्त व्यस्त
जीवन की रफ्तार
जलमग्न सड़कें।
6.
पौधे खिलते
किसान हैं हँसते
वर्षा के संग
मन मयूरा नाचे
बूँदों के संग-संग।
7.
झूमती धरा
झूमता है गगन
आई है वर्षा
लेकर ठंडी हवा
खिल उठा चमन।
8.
घनी प्रतीक्षा
अब जाकर आया
मेघ पाहुन
चाय संग पकौड़ी
पहुना संग खाए।
9.
पानी बरसा
झर-झर झरता
जैसे झरना,
सुन मेरे बदरा
मन हुआ बावरा।
10.
हे वर्षा रानी
यूँ रूठा मत करो
आ जाया करो
रवि से लड़कर
बरसो जमकर।
-0-
2-हमस
आनन्द रोहिला
1
हमने बोए
बीज मधु-प्रेम के
पर ना उगे,
तू रहा बेखबर
मेरे हमसफर ।
2
ढूँढती फिरूँ
दिनभर बाट में
फर्क न पड़ा ,
रही दरबदर
मेरे हमसफर ।
3
रोए कलियाँ
भँवरे चले गए
तेरी तरह,
धुँधला डगर
मेरे हमसर ।
4
भरी गलियाँ
है सुनसान रास्ते
तू दिखा नहीं ,
ये हर्षाए नगर
मेरे हमसफ़र ।
5
माघ किरण
बहे ठंडी पवन
न शांत करे,
ये देख मेरा हश्र
मेरे हमसर ।
-0- आनन्द रोहिला,गाँव व डाकघरअमीन,जिला -कुरुक्षेत्र ,तहसील - थानेसर चलभाष 9050630925