Friday, November 24, 2017

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माहिया :
नोक-झोंक माहिया का विशिष्ट गुण हुआ करता था , जो जीवन की आपाधापी में गुम होता गया। डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा जी ने अपने माहिया में इसे जीवन्त कर दिया है। -सम्पादक
 डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 
1
ये तय इस बार किया 
मैं जाती मैके
घेरो घर-बार पिया।
2
भर चटनी की बरनी 
सखियों संग मुझे 
थोड़ी मस्ती करनी।
3
सब ढंग निराले हैं 
अफसर तुम सजना
छुट्टी के लाले हैं ।
4
तू है मन की भोरी 
खूब थका लेंगी 
चंचल सखियाँ तोरी ।
5
दिल को दिल भाएँगे 
दिन दो-चार रुको 
दोनों मिल आएँगे ।
6
ग़म से पहचान नहीं 
तुम बिन अब सजनी 
जीना आसान नहीं ।
7
मत बात करो खोटी
तुम घूमो जग में 
मैं घर सेकूँ रोटी ।
8
सीधा- सा काम करो 
टिकट अभी मेरा 
बनवा आराम करो ।
9
ये राग पुराने हैं 
बाँध मुझे रखना 
सब खूब बहाने हैं ।
10
क्या बात करो गोरी ?
कटतीं ना सच में 
तुम बिन रतियाँ मोरी ।
11
देखो मनुहार करूँ
तुम बिन चैन नहीं 
बस तुमसे प्यार करूँ ।
12
दुखतीं अँखियाँ मेरी 
फोन मुआ तेरा 
कितनी सखियाँ तेरी ।
13
कितना बतियाते हो 
क्या जानूँ कित से 
दाना चुग आते हो ।
14
मैं तो अब जाऊँगी 
कुछ दिन जी भरकर 
मिल, वापस आऊँगी ।
15
जपना मीरा, राधा 
हो आजाद पिया 
सब दूर हुई बाधा ।
16
छोड़ो भी ये ताना 
ओ सजनी प्यारी  
जल्दी घर आ जाना ।
17
हूँ चाँद, चकोरी ने 
फोन किया देखो 
मैके से गोरी ने ।
18
कैसे हैं हाल पिया 
महँगी है रोटी 
गलती क्या दाल पिया ।
19
मत फिकर करो मेरी 
दे जाती थाली 
दिलदार सखी तेरी ।
20
है बात न जल्दी की 
मुझको क्या चिंता 
आटे या हल्दी की ।
21
कैसे नादान पिया 
फैटी फ़ूड तुम्हें 
देता नुकसान पिया।
22
मैं टिकट कटाती हूँ 
साँझ ढले सजना 
वापस घर आती हूँ ।

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11 comments:

ज्योति-कलश said...

मेरी अभिव्यक्ति को यहाँ स्थान देने के लिए
सम्पादक द्वय के प्रति हृदय से आभारी हूँ |

सादर

Unknown said...

वाह प्रिय सखी आपके लेखन के सभी रंग निराले है । मन प्रसन्न हो गया पढ़कर । गज़ब के माहिया लिखे । आत्मिक बधाई जी

कैसे नादान पिया
फैटी फ़ूड तुम्हें
देता नुकसान पिया ।

अनिता मंडा said...

वाह, क्या कहने
ग़ज़ब की नोंक-झोंक

भावना सक्सैना said...

वाह ज्योत्सना जी, तरोताज़ा हो गए आपके माहिए पढ़कर। सुंदर सृजन के लिए बधाई।
सादर,
भावना

Kamlanikhurpa@gmail.com said...

आनंद आ गया पढकर ज्योत्सनाजी । बधाई
प्राचार्य सम्मेलन 2017 में मैने और मेरी एक सहेली ने पंजाबी टप्पे गाए थे । वही मीठी नोकझोक वाली टप्पों की मधुर यादें फिर से जीवंत हो उठीं ।

Vibha Rashmi said...

नोक - झोंक के चुटीले माहिया पढ़कर बहुत आनंद आया । ज्योत्सना जी बहुत बधाई ।
सस्नेह विभा रश्मि

Unknown said...

बहुत बड़िया है प्रिया प्रियतम की यह नोक झोंक माहिया के रूप में ।नोक झोंक भी जरूरी है एक रस जिन्दगी में । बहुत बहुत सुन्दर लगी ज्योत्स्ना जी खट्टी मिट्ठी यह अभिव्यक्ति ।वाह ! वाह ! ! करते रहो और जी करता गा गा कर सुनाते रहो । बहुत सारी बधाई ।

Pushpa mehra said...


बहुत ही सुंदर नोंक-झोंक भरे रसीले प्रवाहमय माहिया ज्योत्स्ना जी बधाई|

पुष्पा मेहरा

ज्योति-कलश said...

hruday se aabhaar aadaraniya Pushpa ji , Kamla Ghataaura ji , vibhaa ji , bhaavanaa ji , priy anita manda evam sunita ji ..dil se shukriyaa apakaa

bahut-bahut shukriyaa Kamla Nikhurpa ji ..hme kab milenge aapake gaaye tappe sunane ko :)

Jyotsana pradeep said...

कमाल के ज़ायकेदार माहिया हैं सखी ...एक अनूठा स्वाद है इन माहिया मैं,मन प्रसन्न हो गया !ह्रदय तल से बधाई प्रिय सखी !

ज्योति-कलश said...

हृदय से आभार सखी ज्योत्स्ना जी :)