Monday, December 4, 2017

784

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
1
मन-मीत चले आओ
दो पल बाकी हैं
सीने से लग जाओ।
2
तन से तुम दूर रहे
पर सूने मन में
तुम ही भरपूर रहे ।
3
बस इतना जाने हैं-
इस जग में तुमको
हम अपना माने हैं।
4
जाने कब आओगे !
बाहों में खुशबू
बनकर खो जाओगे।
5
कुछ समझ नहीं आता
कितने जन्मों का 
मेरा तुमसे नाता ।
6
जब अन्त इशारा हो
होंठों पर मेरे
बस नाम तुम्हारा हो।
7
जिस लोक चला जाऊँ
चाहत इतनी-सी-
तुमको ही मैं पाऊँ।
8
तुमको जब पाऊँगा-
पूजा क्या करना
मंदिर क्यों जाऊँगा।
9
चन्दा तुम खिल जाना
सूनी रातें हैं
धरती से मिल जाना।
10
नभ आज अकेला है
प्यासी धरती से
मिलने की बेला है।
11
जीवन में प्यास रही-
जो दिल में रहते
मिलने की आस रही।
12
चित्र; कमला निखुर्पा 
बादल तुम ललचाते
आकर पास कभी
क्यों दूर चले जाते ।
13
धरती ये प्यास-भरी
बादल रूठ गए
मन की हर आस मरी।
14
तुमको पा जाऊँगी
कब तक रूठोगे
हर बार मनाऊँगी।
15
इस आँगन बरसोगे
प्यासा छोड़ मुझे
तुम भी तो तरसोगे।
-0-

15 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर

Vibha Rashmi said...

कुछ समझा नहीं आता
कितने जन्मों का
मेरा तुमसे नाता ।
बहुत सुन्दर ,मर्मस्पर्शी माहिया । हार्दिक बधाई लें हिमांशु भाई जी ।

Kavita Bhatt said...

भावपूर्ण हैं माहिया, हार्दिक बधाई महोदय।

Satya Sharma said...

बहुत ही सुंदर भावपूर्ण माहिया ।
हार्दिक बधाई आदरणीय भैया ।

Satya Sharma said...

बहुत ही सुंदर भावपूर्ण माहिया ।
हार्दिक बधाई आदरणीय भैया ।

Dr Purnima Rai said...

वाह!!हृदयस्पर्शी एवं मनमोहक माहिया....आदरणीय यह माहिया सदाबहार रहेंगे। नमन

anita manda said...

बहुत ख़ूब !!
लय, भाव से परिपूर्ण माहिये मन को छू गये।

Dr. Surendra Verma said...

प्यार से लबालब | सर्वथा गेय |सु. व.|

sunita kamboj said...

मनमोहक, ह्र्दयस्पर्शी माहिया आदरणीय ..सादर नमन ।

jyotsana pardeep said...


जिस लोक चला जाऊँ
चाहती इतनी-सी-
तुमको ही मैं पाऊँ।

तुमको जब पाऊँगा-
पूजा क्या करना
मंदिर क्यों जाऊँगा।

बहुत खूबसूरत माहिया !गहरे पावन प्रेम के सागर में कँवल से खिल रहे हैं ये माहिया ...हर फूल की एक अलग ही छवि है बहुत - बहुत बधाई भैया जी !

ज्योति-कलश said...

प्रेम रस भीने बहुत सुन्दर ,सरस माहिया !

हार्दिक बधाई भैया जी !!

Savita Aggarwal said...

बहुत सरस मनमोहक माहिया का सृजन किया है भाई कम्बोज जी | हार्दिक बधाई |

Krishna said...

प्रेम रस में भीगे मर्मस्पर्शी माहिया। बहुत-बहुत बधाई भाईसाहब।

रश्मि शर्मा said...

बहुत ही भावपूर्ण और खूबसूरत।

प्रियंका गुप्ता said...

जब अन्त इशारा हो
होंठों पर मेरे
बस नाम तुम्हारा हो।
इतना प्रेम जहाँ हो, वहाँ किसी और दुआ की ज़रूरत ही नहीं रह जाती...| अप्रतिम...|
बाकी सभी माहिया भी बहुत ही ज़्यादा पसंद आए...|
ढेरों बधाई...|