Saturday, November 18, 2017

780

मंजूषा मन
1.
तुम्हारा ख़्या
लगे ज्यों नर्म शॉल
भावों की गर्मी,
नेह का उपहार,
बना रहे ये प्यार।
2.
तुम्हारा साथ
सर्दियों में लिहा
नर्म आभास
ओढ़ के इतराऊँ
हृदय से लगाऊँ।

-0-

11 comments:

Kavita Bhatt said...

वाह, बहुत सुंदर , बधाई मन जी।

sunita kamboj said...

वाह बहुत सुंदर , हार्दिक बधाई मंजूषा जी ।

Vibha Rashmi said...

बहुत सुन्दर अहसासों के ताँका मन जी । बधाई लें ।

Vibha Rashmi said...
This comment has been removed by the author.
Pushpa Mehra said...


जीवन में साथी और उसके स्नेह भरे सम्बन्धों का महत्व बताते ताँका सुंदर लगे,बधाई

पुष्पा मेहरा

Satya Sharma said...

बहुत ही सुंदर .. लाजवाब
हार्दिक बधाई मंजूषा जी

Satya Sharma said...

बहुत ही सुंदर .. लाजवाब
हार्दिक बधाई मंजूषा जी

Satya Sharma said...

बहुत ही सुंदर .. लाजवाब
हार्दिक बधाई मंजूषा जी

मंजूषा मन said...

ताँका पसन्द करने के लिए आप सभी का बहुत बहुत आभार...

यूँ ही शुभकामनाएं बनाये रखियेगा

Krishna said...

बेहद सुंदर तांका... मंजूषा जी हार्दिक बधाई।

प्रियंका गुप्ता said...

क्या बात है...! उम्दा...| मेरी बधाई