Thursday, June 1, 2017

766

रेखा रोहतगी
1
जो उनसे अनबन  है
रूठूँ  या मानूँ

दिल में ये उलझन है
 2
 
तुमने मारा ताना
 
तीर धँसा दिल में
 
तुमने ये कब जाना
 3
 
जो बात नहीं जँचती
 
लाख जतन कर लूँ
 
वो बात नहीं  पचती
4
 
मैं गुस्से में ऐंठी
जाते देख उसे
सब मान भुला बैठी

3 comments:

sunita kamboj said...

सुंदर माहिया रेखा जी

ज्योति-कलश said...

प्यार तकरार भरे सुंदर माहिया '
बहुत बधाई !!

Kashmiri Lal said...

beutiful