Saturday, August 27, 2016

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1-कृष्णा वर्मा
1
खुशियाँ बेताज हँसी
चंद खिलौनों का
बचपन मोहताज नहीं।
2
ना गीत- ग़ज़ल सोहे
अब तो आठ पहर
प्राणों में सुधि रोए।
3
लड़ने से कब जीता
दोनों हार गए
इक बिखरा इक टूटा।
4
जब से अपना छूटा
बाहर-परत वही
भीतर-भीतर टूटा।
5
माँ छोड़ न तू डोरी
बचपन ज़िंदा रख
ना मरने दे लोरी।
-0-
2- धरा का आलिंगन
डॉ.पूर्णिमा राय
1
बरसे बदरा
छमाछम झंकार
प्रमुदित भू
पत्तों के आँचल पे
दिखें बूँदें मोती- सी !!
2
श्वेत उज्ज्व
हुआ नभ आँगन
बरसात में
छलक पड़ा घड़ा
याद कोहराम से !!
3
गहरे छिपे
अंतस की बात में
हुए प्रत्यक्ष
वर्षा की सौगात से
हो मधुर मिलन !!
4
सूनी बगिया
सजी हरीतिमा से
नाचे डालियाँ
सकुचाई लजाई
जैसे नवयौवना !!
5
मिला गगन
धरा का आंलिगन
भरा जल से
जब बादल बरसे
तृप्त हुई आत्माएँ !!
-0-

24 comments:

Vibha Rashmi said...
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Vibha Rashmi said...
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Vibha Rashmi said...

कृष्णा वर्मा जी के भावप्रणव माहिया बहुत मृदुल हैं । बधाई कृष्णा जी । प्रकृति की सर्गिक सुन्दरता के सुन्दर सदोका 'धरा का आँगन ' के लिए बहुत बधाई पूर्णिमा जी । माहिया ,सदोका दोनों भाए ।

Vibha Rashmi said...

कृष्णा वर्मा जी के भावप्रणव माहिया बहुत मृदुल हैं । बधाई कृष्णा जी । प्रकृति की सर्गिक सुन्दरता के सुन्दर सदोका 'धरा का आँगन ' के लिए बहुत बधाई पूर्णिमा जी । माहिया ,सदोका दोनों भाए ।

Dr Purnima Rai said...

आभार विभा जी..ये ताँका रचना है...

Dr Purnima Rai said...

आभार विभा जी..ये ताँका रचना है...

Dr Purnima Rai said...

माँ छोड़ न तू डोरी
बचपन ज़िंदा रख
ना मरने दे लोरी।

बेहद सुंदर माहिया..कृष्णा वर्मा जी

Dr Purnima Rai said...

माँ छोड़ न तू डोरी
बचपन ज़िंदा रख
ना मरने दे लोरी।

बेहद सुंदर माहिया..कृष्णा वर्मा जी

sunita kamboj said...

लड़ने से कब जीता
दोनों हार गए
इक बिखरा इक टूटा।

कृष्णा वर्मा जी बहुत सुंदर माहिया

sunita kamboj said...

पूर्णिमा जी बहुत सुंदर सृजन हार्दिक बधाई

Sudershan Ratnakar said...

कृष्णाजी बहुत सुंदर माहिया।

पूर्णिमाजी प्राकृतिक छटा बिखेरते बहुत सुंदर ताँका
आप दोनों को हार्दिक बधाई।

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

सुंदर भावपूर्ण माहिया एवं ख़ूबसूरत प्राकृतिक छटा बिखेरते ताँका!
आ. कृष्णा दीदी एवं डॉ. पूर्णिमा राय जी को हार्दिक बधाई !!!

~सादर
अनिता ललित

Savita Aggarwal said...

कृष्णा जी और डॉ पूर्णिमा जी को भावपूर्ण माहिया और ताँका की रचना के लिए बहुत बहुत बधाई ।

Poonam Chandra 'Manu' said...

लड़ने से कब जीता
दोनों हार गए
इक बिखरा इक टूटा। सुंदर भाव कृष्णा जी हार्दिक बधाई।
गहरे छिपे
अंतस की बात में
हुए प्रत्यक्ष
वर्षा की सौगात से
हो मधुर मिलन !!बहुत सुंदर डॉ पूर्णिमा जी हार्दिक बधाई।

Kashmiri Lal said...

Beautiful

Dr Purnima Rai said...

आभार ....सुनीता जी,सदर्शन रत्नाकर जी,अनिता ललित जी,सविता जी,पूनम जी,कश्मीरी लाल जी

Dr Purnima Rai said...

आभार ....सुनीता जी,सदर्शन रत्नाकर जी,अनिता ललित जी,सविता जी,पूनम जी,कश्मीरी लाल जी

Krishna said...

बहुत सुन्दर मोहक ताँका! डा. पूर्णिमा राय जी हार्दिक बधाई।

Dr. Surendra Verma said...

मोहक माहिया और तबीयत खुश कर देने वाले तांका रचना कारों को बधाई।

Dr. Surendra Verma said...

मोहक माहिया और तबीयत खुश कर देने वाले तांका रचना कारों को बधाई।

Dr.Bhawna said...

bahut bhavpurn bahut bahut badhai...

ज्योति-कलश said...

बहुत सुन्दर माहिया और तांका रचनाएँ !
आ कृष्णा दी एवं डॉ. पूर्णिमा राय जी को बहुत -बहुत बधाई !

jyotsana pardeep said...



कृष्णा जी और डॉ पूर्णिमा जी को भावपूर्ण माहिया और ताँका की रचना के लिए बहुत -बहुत बधाई ।!!

प्रियंका गुप्ता said...

कृष्णा जी और पूर्णिमा जी...इतने अच्छे माहिया और तांका के लिए ढेरों बधाई स्वीकारें...|