Sunday, May 22, 2016

705

सूरज नासपिटा 
डॉ जेन्नी शबनम 

सूरज पीला 
पूरब से निकला 
पूरे रौब से 
गगन पे जा बैठा
गोल घूमता 
सूरज नासपिटा
आग बबूला 
क्रोधित हो घूरता,  
लावा उगला
पेड़-पौधे जलाए 
पशु -इंसान 
सब छटपटाए  
हवा दहकी 
धरती भी सुलगी   
नदी बहकी  
कारे बदरा ने ज्यों 
ली अँगड़ाई 
सावन घटा छाई 
सूरज चौंका 
''मुझसे बड़ा कौन?
मुझे जो ढका'',
फिर बदरा हँसा  
हँस के बोला -
''सुनो, सावन आया 
मैं नहीं बड़ा
प्रकृति का नियम 
तुम जलोगे 
जो आग उगलोगे 
तुम्हें बुझाने 
मुझे आना ही होगा'',
सूरज शांत 
मेघ से हुआ गीला 
लाल सूरज 
धीमे-धीमे सरका 
पश्चिम चला 
धरती में समाया 
गहरी नींद सोया !

-0-

10 comments:

Savita Aggarwal said...

वाह डॉ जेन्नी जी बहुत सुन्दर चौका लिखा है । सच ही है गर्मी में जब सूरज आग उगलता है तो नासपीटा ही लगता है ।हार्दिक बधाई आपको ।

Kamla Ghataaura said...

जेन्नी जी आग बबूले सूरज को प्यार भरे क्रोध से जो गाली दी सही जगह पर आने से सज गई ।आखिर ग्रीष्म का सूरज है ही इस लायक ।
उसे उसकी औकात दिखाने सावन को आना ही पड़ता है ।कोई किसी से बड़ा नही सब अपनी जगह बड़े हैं ।सुन्दर चौका ।बधाई स्वीकारे बड़े दिनों बाद आये ।

Dr.Bhawna said...

suraj par aapko krodh achha laga meri badhai...

Manju Gupta said...

सामयिक भीषण वैशाख की गर्मी को दर्शाता सुंदर मनभावन चौका .
बधाई

Krishna said...

वाह! जेन्नी जी बहुत खूब सूरज भले तपाने से बाज ना आए लेकिन मीठी सी झिड़की और गाली दे कर मन को ठंडक तो मिल ही जाती है। बहुत बढ़िया चोका.... हार्दिक बधाई।

Sudershan Ratnakar said...

जेन्नी जी तपते सूर्य का बहुत सुंदर वर्णन। अच्छा चोका।

Ram Sharan Maharjan said...

bahut achchha lagaa.

jyotsana pardeep said...

वाह! जेन्नी जी वैशाख की गर्मी को दर्शाता सुंदर चौका .लिखा है आपनें... हार्दिक बधाई आपको ।

ज्योति-कलश said...

बहुत खूब जेन्नी जी ! चलचित्र चला दिया आपने तो ...प्रचंड गर्मी और वर्षा का आगमन ...बहुत सुंदर !
हार्दिक बधाई !!

प्रियंका गुप्ता said...

वाह जेन्नी जी...बहुत अनोखा और खूबसूरत चोका है...|
हार्दिक बधाई...|