Tuesday, January 5, 2016

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1-अमित अग्रवाल
1
पीपल तले
प्रेमपाश में बँधे
सोये अलस
अँधेरा व चाँदनी
सवेरा न हो कभी
-0-
हाइबन
जिजीविषा - शशि पाधा

घर के पिछले  आँगन में गुलाब के फूलों की बाड़ लगी है । वसंत ऋतु में तथा ग्रीष्म ऋतु में इन बाड़नुमा पौधों पर गुलाबों की बहार छा जाती है । इतने गुलाब होते हैं कि पत्तियाँ कम और फूल अधिक दिखाई देते हैं । जब ठंडी हवा चलती है तो इन फूलों की खुश्बू चारों ओर बिखर जाती है । बहुत से मित्र इस बहार को अपने कैमरे में कैद करके ले जाते हैं । इन को छूने कभी तितलियाँ और कभी भंवरे उड़ते दिखाई देते हैं । मेरे लिए इस फुलवारी का विशेष महत्त्व है । मुझे इनका सौन्दर्य इतना लुभाता है कि कई बार इनका रूप रंग मेरी लेखनी की नोक पर आ बैठता है और मुझे कुछ भी रचने को प्रेरित करता है ।
कहावत है ना सब दिन होत ना एक समान । जीवन की तरह मौसम भी बदलते रहते हैं । पतझड़ और फिर शीत ऋतु धीरे धीरे धरती के सौन्दर्य को बुहार के कहीं और ले जाती है । फूल खिलना बंद हो जाते हैं , धूप डालियों पर नहीं झूलती । वासांसि जीर्णानि गीता के इस मन्त्र को सभी वृक्ष चरितार्थ करते हैं । सूखी टहनियाँ घोर दरिद्रता की स्मृति दिलाती हैं । यानी पूरी प्रकृति उजड़ी सी दिखाई देती है ।
मेरे आँगन में लगी गुलाबों की बाड़ में फिर भी कुछ फूल मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं । मानों वो जाते- जाते भी अपनी मुस्कान बाँटना नहीं भूलते । रोज़ कमरे की खिड़की से जब भी मैं उनको देखती हूँ. मेरा शरीर एक नई स्फूर्ति से भर जाता है । उन के आस-पास दो-चार हरी पत्तियाँ ही दिखाई देती हैं ।  किन्तु सूखी टहनियों पर खिलते हुए वो हमें अंत तक सुख बाँटने का संदेश दे रहे लगते हैं ।
और मैं हर रोज़ उनकी जिजीविषा को नमन करती हूँ ।

फूल गुलाब
धन्य है जिजीविषा
बाँटे मुस्कान ।
 -शशि पाधा

16 comments:

Savita Aggarwal said...

वाह शशि जी गुलाबी छटा बिखेरता अपनी महक छोड़ता हाइबन है हार्दिक बधाई.

Savita Aggarwal said...

अमित जी आपने सुन्दर चोके की रचना की है बधाई .

Pushpa Mehra said...

अमित जी का तांका मुझे तो स्पष्ट संदेश देता लगता है कि शुभ्रता, शीतलता व प्रकाश की राह पर चलने में ही अँधेरे की श्रेष्ठता है, उजाला तो अँधेरे को स्व उत्कर्ष के लिए अपने साथ रखना ही चाहता है वही तो ठोकरों से सम्भलना सिखाता है| शशी जी का हाइबान भी सुंदर है, अमित जी और शशि जी को बधाई |

पुष्पा मेहरा

मेरा साहित्य said...

amit ji bahut sunder tanka aur shashi kji haiban ki gulabi chhata man ko sugandh se bhar gayi
badhai aapdono ko
rachana

Amit Agarwal said...

मेरे ताँका को यहाँ स्थान देने के सम्पादक द्वय का आभार!
उत्साहवर्धन के लिए सविता जी, पुष्पा जी और रचना जी का धन्यवाद:)
शशि जी का हाईबन सुन्दर लगा... शुभकामनाएं!
आदरणीया डॉ. संधु को भी सराहना के लिए पुनः धन्यवाद!

anita manda said...

उत्कृष्ट ताँका व हाइबन सृजन हेतु आदरणीय अमित जी व शशि जी को हार्दिक बधाई।

ज्योति-कलश said...

Amit ji bahut sundar saras taanakaa ..haardik badhaii !

mahakataa haaiban bahut mohak lagaaa ..bahut bahut badhaii shashi didi !

Savita Aggarwal said...

अमित जी माफी चाहूंगी आपके ताका को गलती से चोका लिख दिया है .

Kashmiri Lal said...

बढिया

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत सुन्दर तांका और हाइबन...आप दोनों को हार्दिक बधाई...|

Shashi Padha said...

भावप्रबल तांका अमित जी, बधाई | मेरी रचना को माँ देने के लिए आप सब का आभार | धन्यवाद सम्पादक द्वय |

शशि पाधा

Amit Agarwal said...

अनीता जी, ज्योत्स्ना जी, कश्मीरी लाल जी, प्रियंका जी और शशि जी बहुत धन्यवाद!
@ सविता जी: आप ऐसा कह कर मुझे शर्मिन्दा कर रही हैं..

jyotsana pardeep said...

बहुत सुन्दर तांका और हाइबन..आदरणीय अमित जी व शशि जी को हार्दिक बधाई।

Kashmiri Lal said...

खूब वाह !

Sudershan Ratnakar said...

उत्तम ताँका ,प्राकृतिक छँटा बिखेरता सुंदर हाइबन।

Dr.Bhawna said...

bahut achha likha aap dono ne meri shubhkamnaye..