Sunday, November 22, 2015

569

1-मंजूषा मन
1
आँखों भीतर
एक ही सपना था
वो भी न अपना था
टूटा पल में
उस सपने संग
जीना या मरना था .
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2-अनिता मंडा

सिन्दूर, बिंदी
चूड़ी और मेंहंदी,
लाल चुनरी
किये सब शृंगार
चौक सजाओ
मंगल गीत गाओ
वधू तुलसी
वर हैं शालिग्राम
ब्याह कराओ
देने शुभ आशीष
देव हैं उठे
वर-वधू अनूठे
लें फेरे सात
एकादशी पावन
लगे मनभावन।

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6 comments:

Pushpa Mehra said...

sedoka aur tanka dono hi sunder hain, manjusha ji va anita ji badhai.


pushpa mehra

Dr.Bhawna said...

sundar rachnayen...hardik badhai...

anita manda said...

मञ्जूषा जी बहुत सुंदर सेदोका, बधाई।
पुष्पा जी , भावना जी आभारी हूँ आपकी आशीष मेरी रचना को मिली।

jyotsana pardeep said...

manjusha ji va anita ji ... sedoka aur tanka dono hi sunder hain ..haardik badhai

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत सुन्दर रचनाएँ...आप दोनों को हार्दिक बधाई...|

ज्योति-कलश said...

सुन्दर प्रस्तुति ....हार्दिक बधाई !