Monday, November 9, 2015

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अनिता मंडा
1
बढ़ती आएँ
सागर की लहरें
किरणों से मिलने,
भूरे से वस्त्र
रख दिए धुलने
भोर ने उतारके।
2
भोर है आई
पूरब में लालिमा
किरणों ने फैलाई
धीरे से हिली
ओस नहाई कली
मँडराई तितली।
3
रवि-किरणें
लेके गई विदाई
धीमे से रात आई,
मुँह लटका
सूर्यमुखी उन्मन
अब है कुम्हलाई।
4
आई रात तो
पलकों के भीतर
ख्वाबों की तह खोली,
किसने तोड़ी
चुभती सिलवटें
आँखों में रात भर।
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15 comments:

Kamla Nikhurpa said...

पलकों के भीतर ख़्वाबों की तहों को खोलना

वाह बहुत सुन्दर भाव अनिताजी

बधाई
यूं ही लिखती रहिए अनोखे अंदाज में

Kamla Nikhurpa said...

पलकों के भीतर ख़्वाबों की तहों को खोलना

वाह बहुत सुन्दर भाव अनिताजी

बधाई
यूं ही लिखती रहिए अनोखे अंदाज में

Dr.Bhawna said...

Sundar abhivyakti...badhai..

Manjushri Gupta said...

Bahut sundar aur anokhi ahivyakti hai.badhai

Manjushri Gupta said...

Bahut sundar aur anokhi ahivyakti hai.badhai

Manju Gupta said...

ओस नहाई कली
मँडराई तितली। bishesh haen
sbhi ek se badhakar ek haen sedoko
anitaa badhai .

anita manda said...

मेरे सेदोका को यहां स्थान देने हेतु आभार। आप सभी का आभार मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए।

Krishna said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति अनीता जी...बधाई।

sushila said...

सभी सेदोका बहुत ही भावपूर्ण एवं सुंदर । इसका तो जवाब नहीं ! ह्रदय से बधाई अनिता !

आई रात तो
पलकों के भीतर
ख्वाबों की तह खोली,
किसने तोड़ी
चुभती सिलवटें
आँखों में रात भर।

sunita pahuja said...

भोर से रात्रि तक का सुंदर वर्णन अनिता जी, बधाई

मंजूषा 'मन' said...

वाह वाह अनीता जी भाव भरे सेदोके कहे हैं । बधाई

ज्योति-कलश said...

बहुत ख़ूबसूरत ..हार्दिक बधाई अनिता जी !

Kamla Ghataaura said...



अनीता जीअच्छे लगे सारे सेदोका ।सुन्दर अभिव्यक्ति नई कल्पना जैसे भूरे से वस्त्र ... रात का मुँह लटकाना ... बड़िया मानवीकरण । ख्वाबों की तह खोली आदि ।हार्दिक बधाई।

jyotsana pardeep said...

आई रात तो
पलकों के भीतर
ख्वाबों की तह खोली,
किसने तोड़ी
चुभती सिलवटें
आँखों में रात भर।
bahut sundar ! bhor se raaeri tak ka khoobsurat varnan ...sundar srajan ke liye bahut -bahut badhaiyaan anita ji !

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत सुन्दर सेदोका...हार्दिक बधाई...|