Thursday, October 15, 2015

चाँद आया था



1-सुदर्शन रत्नाकर
1
चहचहाती
नीले पंख फैलाती
स्वच्छंद उड़ी
आसमान नापती
वह नन्ही चिड़िया ।



2
चाँद आया था
उजियारा लेकर
मेरे आँगन
पर मैं सोती रही
खिड़की बंद कर।
3
अच्छा लगता
आकाश में उड़ना
पक्षियों -जैसा
घरौंदा नहीं वहाँ
लौटना ही तो होता।
4
घबरा मत
मंज़िलें और भी हैं
बढ़ा क़दम
शूल नहीं जीवन
फूल भी खिलते हैं।
-0-
2-पुष्पा मेहरा
1
श्रमिक  मन
सदा सपने ढोता
ले  आता रंग
जर्जर घर को  भी
वो चित्रों  से सजाता ।
2
छोटा- सा नीड़
फिर हुआ आबाद
झूमती हवा
सोचती चूम गात
क्या गूँजेगा गगन !
3
चुन्नी न ओढ़ी
शील , लाज न छोड़ी
मन -आँखों का
गँदलाया जो पानी
कीच ही कीच दिखी 
-0-
पुष्पा मेहरा , बी-२०१, सूरजमल विहार, दिल्ली -९२     फ़ोन: ०११-२२१६६५९८
-0-
3-प्रियंका गुप्ता
1
उगता सूर्य
जानता है नियति
डूब जाएगा;
फिर नई ऊर्जा ले
रौशनी लुटाएगा ।
-0-
4-मन्जूषा मन
1
माँ भगवती
सुन मेरी पुकार
भव -सागर
बड़ा कठिन लगे
कर न पाऊँ पार।
2
युद्ध विराम
अब टूटे सपने
बचा न कुछ
फैला चिर सन्नाटा
ध्वस्त हैं कामनाएँ
3
ताना बाना ये
कैसे बुना जुलाहे
मुझे सिखा दे
सम्भले न मुझसे
जीवन की ये डोर।
4
टूटे सपने
करीने सजा रखे
मन भीतर
चोटिल कामनाएँ
यादों की निशानियाँ।
5
देखा जो तुम्हें
बरबस रो पड़ीं
मेरी ये आँखें
मन करे सवाल-
वो सुख था या दुःख
-0-
( सभी चित्र गूगल से साभार)

16 comments:

Pushpa Mehra said...

mere tanka ko trivenee mein sthan dene hetu sampadak dway ka hardik abhar|
ghabda mat manjilen aur bhi hain ....... manahshakti jagate shabd soi va bhatakti urja jaga rahe hain.priyanka gupta ka tanka bhi prernaprad hai, manjushha' man' ke tanka bhi sunder hain. sudershan jee ,priyankajee va manjuushha ji ko badhai.
pushpa mehra.

Manju Gupta said...

सभी की कलम लाजवाब बोलती है .
सभी को बधाई

anita manda said...

सुदर्शन जी, पुष्पा जी, प्रियंका जी व मंजूषा जी आप सब के ताँका एक से बढ़कर एक लगे। बधाई सबको।

Savita Aggarwal said...

सुदर्शन जी ,पुष्पा जी,प्रियंका जी और मंजूषा जी ,सभी ने लाजवाब तांका लिखे हैं |आप चारों को हार्दिक बधाई |

मेरा साहित्य said...

shudarshan ji pushpa ji priyanka ji and anjusha ji bhaon ka indradhanush man ko bhaya
bahut bahut badhai
rachana

Dr Purnima Rai said...

सुदर्शन जी पुष्पा जी प्रियंका जी मंजूषा जी
भावपूर्ण अभिव्यक्ति के साथ विषय व्यापकता ने तांका रचनाओं को सुव्यवस्थित रूप दे दिया है।

शुभकामनाएं !!!

मंजूषा "मन" said...

बहुत बहुत सुन्दर तांका प्रस्तुत किये हैं सुदर्शन जी, पुष्पा जी एवम् प्रियंका जी। जीवन के रंगों से सजे।

बहुत बहुत बधाई

मंजूषा "मन" said...

आभार! आप सभी का बहुत बहुत आभार हमारे तांका को पसंद करने के लिए।

स्नेह बनाये रहिये।

jyotsana pardeep said...

बहुत सुन्दर रचनाएँ !सभी एक से बढ़कर एक !
कहीं" चाँद आया था" में दर्द भरी टीस है तो "श्रमिक मन " में आशावाद के प्यारे रंग हैं ...साथ ही "उगता सूर्य " सकरात्मक भाव की ऊर्जा फैलाता है तो "कैसे बना जुलाहे" में जीवन के दुखों का सामना करने की अनुपम गुहार .....
सुदर्शन जी ,पुष्पा जी ,प्रियंका जी एवं मञ्जूषा जी को ढेरों शुभकामनाएं !

Kashmiri lal said...

Beautiful

Krishna said...

बहुत सुन्दर मनभावन ताँका.....पुष्पा मेहरा जी, प्रियंका जी, मंजूषा जी, सुदर्शन जी हार्दिक बधाई।

ज्योति-कलश said...

bahut sundar rachanayen ..sabhi ek se badhakar ek !

sabhi rachanaakaaron ko haardik badhaii !

प्रियंका गुप्ता said...

सबसे पहले तो सम्पादक द्वय का हार्दिक आभार इतने अच्छे रचनाकारों के साथ मुझे भी स्थान देने के लिए...|
आप सबका तहे दिल से शुक्रिया इतने अच्छे कमेंट्स के लिए...और सभी साथी रचनाकारों के बेहतरीन तांका के लिए मेरी ढेरों बधाई...|

Dr.Bhawna said...

चाँद आया था
उजियारा लेकर
मेरे आँगन
पर मैं सोती रही
खिड़की बंद कर।

Bahut manbhavan ..bahut bahut badhai..
देखा जो तुम्हें
बरबस रो पड़ीं
मेरी ये आँखें
मन करे सवाल-
वो सुख था या दुःख
bahut khub! baut bahut badhai..

anya rachnayen bhi bahut pasand aayi sabhi ko hardik badhai...

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

सभी ताँका एक से बढ़कर एक ! अत्यंत भावपूर्ण !
आप सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई !

~सादर
अनिता ललित

मंजूषा 'मन' said...

आप सभी का बहुत बहुत आभार