Tuesday, October 20, 2015

ख्वाबों में आ आते



1-डॉ हरदीप कौर सन्धु
1
ख्वाबों  में आ आते
याद कभी रखते
तो भूल कभी जाते।
2
अब यूँ बेनूर न हो
आज दुआ मेरी
तू दिल से दूर न हो।
3
होंठों से गीत झरें
मीत चलो मिलके
जीवन में  रंग भरें।
4
हमने हर स्वाद चखा
शूलों-फूलों  का
कोई न हिसाब रखा।
5
सावन के झूलों से
लिपटी है खुशबू
ले ओ फूलों से।
6
आँखों से नीर बहे
खुद मिटकर के भी
जियरा की पीर कहे।
7
हर द्वार नहीं मिलती
साँसों की खुशबू
हर रोज़ नहीं खिलती
8
पानी का कतरा है
सबमें घुल जाना
जीवन का खतरा है  
-0-
2-अनिता मंडा

आसरा


हमारे बीच
तूमने कभी एक
खींची दीवार
उसको ही हमने
बनाया घर
मत डालो दरार
उसमें अब,
दीवारों में दरार
होती न अच्छी
छत उठा रखी है
अपने पर
इन दीवारों ने ही
दिया हमें आसरा।
-0-

15 comments:

Dr.Bhawna said...

हमने हर स्वाद चखा
शूलों-फूलों का
कोई न हिसाब रखा।
katu sach! bahut bahut badhai..anitaji ki rachna bhi bahut achhi hai unko bhi badhai...

Dr Purnima Rai said...

खींची दीवार
उसको ही हमने
बनाया घर

अनीता जी नारी मन की कोमलता व अपनापन झलकता है इनमें!! सच में नारी ऐसी ही है

Dr Purnima Rai said...

होंठों से गीत झरें
मीत चलो मिलके
जीवन में रंग भरें।

काश आज हर दिल की ऐसी सोच बन जाए तो रिश्तों मे आ रही दरारें भर जाएंगी और प्रेम व स्नेह की छटा बिखरने लगेगी।

उम्दा माहिया डॉ०हरदीप जी!

प्रियंका गुप्ता said...

आँखों से नीर बहे
खुद मिटकर के भी
जियरा की पीर कहे।
क्या बात है...सारे माहिया एक से बढ़ कर एक...| बहुत बहुत बधाई...|

अनीता जी, इतने सुन्दर चोका के लिए ढेरों बधाइयाँ...|

Amit Agarwal said...

हमने हर स्वाद चखा
शूलों-फूलों का
कोई न हिसाब रखा....behad khubsoorat!
Dr. Sandhu ko shubhkaamnayen!

Amit Agarwal said...

Anita ji, sundar rachna! Shubhkaamnayen..

Pushpa Mehra said...

आओ मिलकर संकल्प करें ,मन में दीवार न उठने दें , मिलकर उसमें नित चमक भरें , चटकन - टूटन पास ना
फटकने दें | घर की छत का आधार तो दीवार ही है ......|अनिता जी बहुत सुंदर कविता | बहन हरदीप जी के सभी
माहिया संवेदना से भरे मन मोह रहे हैं ,आप दोनों को बधाई |
पुष्पा मेहरा

Kashmiri lal said...

सुंदर ! बधाई !

Krishna said...

हमने हर स्वाद चखा
शूलों-फूलों का
कोई न हिसाब रखा।

एक से एक बढ़िया माहिया।
हार्दिक बधाई हरदीप जी।

बहुत सुन्दर चोका अनीता जी बहुत बधाई।

jyotsana pardeep said...

हमने हर स्वाद चखा
शूलों-फूलों का
कोई न हिसाब रखा।
एक से एक बढ़िया माहिया।
हार्दिक बधाई हरदीप जी
अनीता जी, इतने सुन्दर चोका के लिए ढेरों बधाइयाँ...|

anita manda said...

मेरे चोका को यहां स्थान देने व सराहने हेतु आभार।
हरदीप जी एक से बढ़कर एक माहिया हैं आपके।शुभकामनाएँ।

Manju Gupta said...

अब यूँ बेनूर न हो
आज दुआ मेरी
तू दिल से दूर न हो।

हरदीप जी सभी माहिया लय - ताल गहराई लिए हुए , पर यह विशेष लगा . बधाइ

अनीता जी, सुन्दर चोका के लिए बधाइ

Savita Aggarwal said...

हरदीप जी के माहिया अत्यंत भावों से परिपूर्ण है| अनिता जी का भी चोका सुन्दर रचना है आप दोनों को बधाई और शुभकामनाएं |

मंजूषा 'मन' said...

हरदीप जी अति सुन्दर भावपूर्ण माहिया।

हमने हर स्वाद चखा
शूलों फूलों का
कोई न हिसाब रखा।

सुन्दर । बधाई

अनीता जी आपका चोका बहुत अच्छा लगा। बधाई

ज्योति-कलश said...

sundar maahiyaa ...
hamane har swaad aur hothhon se geet kharein ...bahut achchhe lage ..badhaii hardeep ji !

sundar bhaav bhare choka ke liye bahut badhaii anita ji !