Tuesday, October 13, 2015

646



डॉ०पूर्णिमा राय
1
ये फूलों की क्यारी
काँटों -बीच सजी
लगती सबको प्यारी।
2
कानों में रस घोले
मुरली की ये धुन
भेद दिलों के खोले।।
3
आँखों में सपने हैं
तेरा संग मिले
दुश्मन भी अपने हैं।
4
टिप-टिप पानी बरसे
रूठ गये हो तुम
प्रेमी मन ये तरसे।
5
लगता मोरा जिया
गिन -गिन तारे भी
कटती ना रात पिया।
6
राहों  में  हैं काँटें
चुनकर काँटों को
फूलों को हम बाँटें।
-0-
...

14 comments:

Savita Aggarwal said...

डॉ पूर्णिमा जी सभी माहिया का सुन्दर भावों के साथ सृजन किया है |हार्दिक बधाई |नवरात्रि की शुभकामनाएं |

Amit Agarwal said...

bahut sundar maahiya, Purnima ji, shubhkaamnaayen!

Dr Purnima Rai said...

आभार सविता जी!!

Dr Purnima Rai said...
This comment has been removed by the author.
Dr Purnima Rai said...

आभार अमित जी

Dr Purnima Rai said...

आभार सविता जी!!

Manju Gupta said...

ये फूलों की क्यारी
काँटों -बीच सजी
लगती सबको प्यारी।
yah vishesh , sbhi utkrisht haen
badhai

jyotsana pardeep said...

sabhi mahiya bahut pyare purnima ji aapko !haardik badhai !

Sudershan Ratnakar said...

बहुत सुंदर माहिया।

Pushpa Mehra said...

हर माहिया अपने अलग भाव - सज्जा से सजा है , बहुत सुंदर है , पूर्णिमा जी आपको बधाई |
पुष्पा मेहरा

Krishna said...

बहुत सुन्दर माहिया पूर्णिमा जी....बधाई।

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

सुंदर माहिया डॉ पूर्णिमा राय जी !

हार्दिक बधाई !!!

~सादर
अनिता ललित

Dr.Bhawna said...

राहों में हैं काँटें
चुनकर काँटों को
फूलों को हम बाँटें।

bahut khub ! bahut sari badhai aapko sundar lekhn ke liye...

प्रियंका गुप्ता said...

राहों में हैं काँटें
चुनकर काँटों को
फूलों को हम बाँटें।
बहुत सुन्दर माहिया हैं सभी...पर ये वाला अधिक पसंद आया | बधाई...|