Friday, September 11, 2015

यादों वाला पिटारा



1- डॉ भावना कुँअर

हौले से आया
दबे पाँव लेकर
ख्वाबों में मेरे
मेरी अम्मा का गाँव
बिना दस्तक
सपनों के दर पे
रख के गया
सुनहरी यादों के
चमचमाते
जुगनू से दीपक।
पहले लाया
पिटारे से अपने
मीठे से आम
नीम की निबौंलियाँ
जामुन,बेर
मक्खन और छाछ
गरम गुड़
अनोखा बड़ा स्वाद।
बैलों की जोड़ी
घुँघरुओं की बोली।
कुएँ का पानी
परियों की कहानी।
जली-बुझी सी
डिबिया की वो बाती
न बन पाती
जो पतंगों की साथी?
दूजा पिटारा
कचरे और फूँट
मेडों से कहे
वो किस्से भरपूर।
मकई रानी
ओढ़कर दोशाला
शान से खड़ी
है सेक रही धूप।
पोई की बेल
छत पे चढकर
नीचे न आती।
तीजा पिटारा जब
वो खुल जाए
भीनी माटी गंध को
खूब फैलाए।
तीज,होली, दीवाली
तो मेले कभी
जाने कितने रंग।
चौथा पिटारा
चुप न रह पाए।
मीठी गुँझिया,
खोया ओढ़े घेवर
है इतराए।
फूले न समाते थे
नीम के पेड़
चलती थी उनपे
झूलों की रेल।
कितने अनोखे थे
सारे ही खेल।
अब फ्रोजन खाते,
डिबिया नहीं
बल्ब टिमटिमाते।
पेड़ भी नहीं,
बोनसाई सजाते।
न मीठा पानी
बिजलेरी ही लाते।
अगले साल
उस गाँव जाऊँगी
बिना बताए
यादों वाला पिटारा-
अम्मा की बुनी
रंगबिरंगी लोई,
दरी,गलीचा
रंगीन टोकरियाँ
सब लाऊँगी
सूने मन के कोने
फिर हरषाऊँगी।
-0-
2-कमल कपूर

भावना! !!

संग तुम्हारे
बह रही हूँ मैं भी
आँसू नदी में
आसान नहीं होता
यादें भूलाना
और मुश्किल भी है
उन्हें बुलाना
क्यों जी नहीं सकते
उन्हें फिर से
कसक जगती है
सुहाने दिन
जो गुजर गये हैं
अब तो सिर्फ
साँस ही ले रहे हैं ।
-0-
3-सेदोका-कमल कपूर
1
पथ पे मेरे
बिछाते थे वो शूल
मैंने बिछाए फूल
तो हुआ यूँ कि
पलक पाँखुरियाँ
बिछाने लगे हैं वो।
-0-

12 comments:

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

दिल को छूने वाले चोका !
सेदोका भी सुंदर!
हार्दिक बधाई भावना कुँवर जी व कमल कपूर जी !!!

~सादर
अनिता ललित

ज्योति-कलश said...

बहुत सुन्दर भावपूर्ण दोनों चोका और सहज,सरल मोहक सेदोका !
डॉ •भावना कुँअर जी एवं कमल कपूर जी को हार्दिक बधाई !

Kailash Sharma said...

बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण प्रस्तुतियां...

Manju Gupta said...

सभी चोका और सेदोको बहुत ही लाजवाब , मार्मिक भावों के पिटारे की अभिव्यक्ति की है
सभी को बधाई

Anonymous said...

डॉ.भावना जी का चोका अति सुन्दर है, साथ ही कमल जी का चोका और सेदोका भी अति सुन्दर लगे। मंजूषा 'मन' Manjusha Doshi on यादों वाला पिटारा

Shashi Padha said...

यादों का पिटारा उम्र भर साथ ही रहता है और हर घड़ी, हर मोड़ पर हौले से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है | आप दोनों ने बहुत ही सूक्ष्मता से पिटारे की एक -एक चीज़ बाहर निकाली है | आपके पास मेरी चीज़ों जैसा ही सब कुछ है , पढ़ कर खुशी हुई | बधाई आप दोनों को |

सस्नेह,
शशि पाधा

jyotsana pardeep said...

sundar ,bhaavpurn v dil ko choone vali prastutiyaan bhawna ji evam kamal ji ko hriday tal se badhai .........

Pushpa Mehra said...

bhawna ji apaki yadon ka piTara jaise - jaise khulata gaya vaise-vaise mujhe bhi meri yadon ki parton ko kholane ko vivash kar gaya . bahut hi bhavpurn ateet mein jeeta choka, kamal ji ka choka bhi sunder likha hai.donon ko badhai.
pushpa mehra.

anita manda said...

भावना जी बहुत गज़ब चोका।कमाल क्र दो कर दिया आप दोनों ने।
अब फ्रोजन खाते,
डिबिया नहीं
बल्ब टिमटिमाते।
पेड़ भी नहीं,
बोनसाई सजाते।
न मीठा पानी

Krishna said...

बहुत ख़ूबसूरत भावपूर्ण सभी चोका और सेदोको.... भावना कुँअर जी, कमल कपूर जी हार्दिक बधाई !

Dr.Bhawna said...

bahut man se likha tha maine ye choka aap tak pahuch gaya uske liye aabhari hun..

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत मर्मस्पर्शी चोका...| सेदोका भी बहुत पसंद आया |
आप दोनों को हार्दिक बधाई...|