Wednesday, July 29, 2015

भूला गान मिला



डॉभावना कुँअर
1
है मुश्किल राह बड़ी
पर सच की सीढ़ी
सबने कब  यार चढ़ी ।
2
रिश्तों को मान मिला
जैसे कोयल को
फिर भूला गान मिला ।
3
कुछ नीड़ बनाए थे
जिनमें यादों के
पंछी  उड़ आए थे ।
4
खुद से ही कह लेंगे
हम तो मोती हैं
सागर में  रह लेंगे
5
सच की राह न छोड़ें
तूफ़ानों से डरकर
नौका न कभी मोड़े ।
6
रोकर क्या पाओगे
कुछ शुभ कर्म करो
जीवन तर जाओगे
7
विषधर पहचाने हैं-
अच्छा  , कौन बुरा
वो सब ही जाने हैं।
8
अपनों से बच रहना
खोलो  ना पलकें
सपने क्या, मत कहना।
9
यादें मधुर  सजाना
कड़वाहट पीकर
सुख का साज बजाना ।
10
हैं मीठे बोल कहाँ
महक उठे  जीवन
वे पल अनमोल कहाँ ।
11
सब सच्चे मीत गए
सपनों के जैसे
भोर हुई रीत गए ।
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10 comments:

Rekha said...

माहिया एकादश
सभी यथार्थपरक एवं सुन्दर
भावना जी बहुत बहुत बधाई ।

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

बहुत सुंदर माहिया ! विशेषकर--

अपनों से बच रहना
खोलो ना पलकें
सपने क्या, मत कहना।

यादें मधुर सजाना
कड़वाहट पीकर
सुख का साज बजाना ।

हैं मीठे बोल कहाँ
महक उठे जीवन
वे पल अनमोल कहाँ ।--मन को छू गए।

हार्दिक बधाई !

~सादर
अनिता ललित

ज्योति-कलश said...

बहुत सुन्दर ,मोहक माहिया ...

रिश्तों को मान मिला ,रोकर क्या पाओगे और हैं मीठे बोल कहाँ ..बेहद ख़ूबसूरत !

भावना जी को हार्दिक बधाई !!

anita manda said...

बेहद खूबसूरत भावों से सजे माहिया।
भावना जी को हार्दिक बधाई।

Kashmiri lal said...

माहिया रंगों के साथ पेश

Savita Aggarwal said...

भावना जी अपनों से बच रहना ...बहुत खूब लिखा है हार्दिक बधाई !

Dr.Bhawna said...

Are mere mahiya yaha 😳 socha nahi tha or aap logon ja itna payar man khush ho gaya aaj dekha Maine to bahut bahut dhanyvaad aap sabke sneh ke liye aabhar Kamboj ji ka pata nahi kitna kaise dun mahiya likhna unhone hi to sikhaya mujhe bas unke liye bahut sari shubkamnayen sahity jagat ke liye

Krishna said...

सभी माहिया बहुत भावपूर्ण!

अपनों से बच रहना
खोलो ना पलकें
सपने क्या, मत कहना।......लाजवाब!
सच कहा---आज अपने ही विश्वास के काबिल नहीं रह गए।
बहुत-बहुत बधाई भावना जी।

सहज साहित्य said...

भावना कुँअर जी के माहिया दिल की गहराइयों से अंकुरित होकर यथार्थ की ज़मीन पर पल्लवित और पुष्पित हुए हैं। मेरे लिए जो लिखा वह उनकी विनम्रता और बड़प्पन का प्रतीक है।

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण माहिया हैं...बड़ी सहजता से जो दिल तक जा पहुंचे...| भावना जी को बधाई...|
काम्बोज अंकल के लिए उन्होंने जो कहा, उससे मैं भी पूरी तौर से सहमत हूँ...| मुझे भी उन्होंने ही हाइकु, तांका जैसी विधाओं के साथ-साथ माहिया लिखना सिखाया...| लगे हाथ मेरा भी उनके लिए नमन और आभार...|