Thursday, July 23, 2015

बहुत बड़ा बच्चा



प्रियंका गुप्ता

       उसे जब भी देखती हूँ, जाने क्यों एक तरफ़ तो भगवान द्वारा की हुई एक ज़रा-सी चूक पर बहुत ममत्व उमड़ता है और दूसरी तरफ़ इंसान के बनाए इस समाज की सोच के प्रति वितृष्णा अपजती है। वो, यानी सजल...शारीरिक उम्र शायद तेस-चौबीस वर्ष...पर मानसिक उम्र अभी बारह-तेरह साल की ही है। मेरे घर की पिछली गली में रहने वाला वो मासूम बच्चा...हाँ, बच्चा ही तो है वो अब भी...अक्सर छुट्टी में या फिर शाम को मेरी गली चला आता है...। दुनियावी तौर पर अपने से आठ-दस साल छोटे बच्चों के साथ कभी क्रिकेट खेलने...तो कभी यूँ ही गप्पे लड़ाने...। बच्चे उसका मज़ाक बनाते रहते हैं...। हैसियत में सबके मुकाबले कहीं से भी कमतर नहीं है वो अपने परिवार का कलौता चश्मे-चिराग़, इस सच्चाई से हर बच्चा अच्छी तरह वाक़िफ़ है, सो उससे कोई बदसलूकी तो नहीं होती...पर छिपे तौर पर बच्चों के पीछे-पीछे दुम हिलाते दौड़ते स्ट्रीट-डॉग से ज़्यादा उसकी कोई अहमियत है भी नहीं...। बच्चों के लिए वो दोस्त नहीं, बल्कि अपनी भोली बातों से सिर्फ़ उनके मनोरंजन करने का एक साधन मात्र है...। पर सजल तो मानो अपनी मानसिक उम्र के बराबर बच्चों में पनप चुकी इस सामाजिक परिपक्वता से भी पूरी तौर से अनजान है। उसे तो बस इस बात में ही खुशी मिल जाती है कि उसके इतने सारे दोस्त हैं, जो उसे टीम में शामिल किए हुए हैं। कब कौन बच्चा ग़ैर-मौजूद है, उसे बहुत लम्बे समय तक यह याद रहता है...और जब तक वो उसकी ख़ैर-ख़बर नहीं जान लेता, बेहद बेचैन रहता है...। कभी उसे दुकान पर मिल जाओ, तो नमस्ते, कैसी हैं आटी...? पूछने के साथ-साथ दुकानदार को हिदायत देना नहीं भूलेगा...अंकल, मेरी आटी हैं...। सामान सही तौलिएगा...और फिर लपक कर हर थैला भी उठा लेगा...। मना करो तो बेहद गर्व से अपनी बाँहें फैला कर दिखाएगा...देखिए तो...मैं मोटा हो गया न...? रोज़ मम्मी जो दूध देती है न, सब पी जाता हूँ...। फ़्रूट्स भी खाता हूँ...। जब बड़ा हो जाऊँगा न, तो आयरन मैन भी बन जाऊँगा...। ये थैले तो बहुत हल्के हैं...। आप सब सामान ले लीजिए...। आपको घर छोड़ कर ही जाऊँगा...तब तक रुका हूँ आपके साथ...डोन्ट वरी...।

उसकी ऐसी बातें सुन कर मेरी आँखों के आगे उन सब परिचित...तथाकथित बड़े हो रहे बच्चों की तस्वीर घूम जाती है जो कभी दूर से सामान के बोझ से लदे-फँदे देख कर नमस्ते कहने की कौन कहे, बड़ी सफ़ाई से कन्नी काट कर निकल जाते हैं...। किसी पराए की तो छोड़िए, किसी अपने की मदद करना भी उनको बोझ लगता है...। ऐसे में सजल की...जब बड़ा हो जाऊँगा...की ख़्वाहिश सुन कर मन से बस एक आह निकलती है...अगर इस समाज में पल रहे बच्चों की तरह बड़ा होना चाहते हो, तो सजल...कभी बड़े न होना...।
आज का बच्चा
बचपन की डोर
थाम न पाया ।
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12 comments:

Asha Pandey said...

बडा़ ही मार्मिक हाइबन है.सच मे ,बच्चों का बचपन बना रहे तो दुनिया कितनी सुन्दर लगे .बधाई प्रियंका जी.

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

दिल को छूने वाला हाइबन है...
इस सृजन के लिए आपको हार्दिक बधाई !
~सादर
अनिता ललित

Savita Aggarwal said...

प्रियंका जी बहुत सुन्दर तरीके से और सुन्दर शब्दों के साथ हाईबन की रचना की है |हार्दिक बधाई |

ज्योति-कलश said...

बहुत मर्मस्पर्शी हाइबन प्रियंका जी ! दिल से दुआ !!

Rekha said...

संवेदनपूर्ण वेदना जगाता हाइबन ।

Krishna said...

बहुत हृदयस्पर्शी हाइबन पढ़ कर मन भर आया।

Kamla Ghataaura said...


प्रियंका जी बहुत कलात्मक ढंग से हाइबन लिखा। मन को छू गया।
हम इंसान की थोड़ी सी कमी के कारण उसे अपने से निम्न आंकने लगते हैं। उसके अंदर की निर्मलता और भोलेपन नजर अंदाज कर देतें हैं। समझदार बच्चों से ज़ियादा लगी बड़े बच्चे की समझ। बहुत सारी वधायी इस हृदय स्पर्शी रचना के लिए।

Pushpa Mehra said...

man ko chhune vala haiban hai .mansik roop se pichhade bachhe samaj mein utana hi pyar aur samman pane ke adhikari hain jitana ki samanya bachhe. aise bachhe mata- pita se mila pyaar aur unaka apani or vishesh dhyan pakar sanTushhT rahte hain sabako nishchhal man se pyar dekar pyar aur sahanbhuti bhi pate hain. pyar evam sauhard ki hi jeet hoti hai anajana sandesh to ye bachhe hi dete hain. pata nahin bachhe ke bare mein padh kar mere man mein yahi vichar kyon aya!sunder aur sachhai par adharit
haiban hetu badhai.
pushpa mehra.

Kashmiri lal said...

बचपन का चंगा सपना संजोया है ।बधाई !

jyotsana pardeep said...

bada hi marmik haiban ! dil ko chune wale haiban ko likha bhi bahut hi sundarta se hai aapne priyanka ji !...badhai v shubhkaamnayen.

Dr.Bhawna said...

man men pyar or maan badhata hai aise bachhon ke liye bahut achha laga padhkar bahut bahut badhai...

मेरा साहित्य said...

piyanka ji bahut khoob haiban sunder man ko chhune vala aur sach bhi
badhai
rachana