Friday, July 17, 2015

क़िस्मत के क़िस्से हैं



डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
1
पक्के ही वादों से
हार सदा हारी
मज़बूत इरादों से ।
2
मौसम है हरजाई
बरखा की चाहत
सूरज ले अँगड़ाई ।
3
क़िस्मत के क़िस्से हैं-
फूल उन्हें,काँटे -
सब अपने हिस्से हैं ।
4
हर मुश्किल पार गए
पर अपने दिल के
आगे हम हार गए ।
5
समझो हर चाल भी
ग़ैरों के आगे
कहना मत हाल कभी ।
6
तेरी मीठी बोली में
डाल गई क़िस्मत
कुछ ख़ुशियाँ झोली में ।
7
आँगन में धूप खिली
मिलनी थी रहमत
वो तेरे रूप मिली ।
7
फिर आग लगे भारी
बोएँगे दिल में
जो शक की चिंगारी।
8
जाएँगे दुख देकर
घूम रहे शातिर
चकमक पत्थर लेकर ।
9
मुट्ठी में चाह नहीं
इतनी सरल सखी
चाहत की राह नहीं ।
-0-

9 comments:

Dr.Bhawna said...

मुट्ठी में चाह नहीं
इतनी सरल सखी
चाहत की राह नहीं ।

bahut sundar! bahut bahut badhai...

anita manda said...

4
हर मुश्किल पार गए
पर अपने दिल के
आगे हम हार गए ।
सारे माहिया बहुत ही सुंदर।

ज्योति-कलश said...

इस स्नेह और सम्मान के लिए संपादक द्वय , भावना जी एवं अनिता जी के प्रति हृदय से आभारी हूँ !

सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

Kashmiri lal said...

शिकाईतों और रुसवाई से भरभूर सुंदर माहिया ।बधाई !

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

वाह! सभी माहिया एक से बढ़कर एक ! विशेषकर-

हर मुश्किल पार गए
पर अपने दिल के
आगे हम हार गए ।

समझो हर चाल सभी
ग़ैरों के आगे
कहना मत हाल कभी । -- यथार्थ को बयान करते हुए !

हार्दिक बधाई प्रिय सखी ज्योत्स्ना जी !

सादर/सस्नेह
अनिता ललित

Pushpa Mehra said...

'har mushkil par gaye
par apane dil ke
age ham haargaye '.sachmuch mein. jyotsna ji sabhi mahiya bahut hi achhe hain .badhai.
pushpa mehra.b

ज्योति-कलश said...

aadaraneey Kashmiri lal ji , Pushpa di evam sakhi Anita lalit ji ...
prerana bharee upasthiti ke liye bahut-bahut aabhaar !

jyotsana pardeep said...

bahut sundar mahiya jyotsna ji ....pyari v prerak pantiyaan-
हर मुश्किल पार गए
पर अपने दिल के
आगे हम हार गए । sadar naman ke saath badhai bhi -

प्रियंका गुप्ता said...

हर मुश्किल पार गए
पर अपने दिल के
आगे हम हार गए ।

समझो हर चाल सभी
ग़ैरों के आगे
कहना मत हाल कभी ।
बिलकुल सही बात है...| सभी माहिया बहुत पसंद आए...हार्दिक बधाई...|