Monday, June 29, 2015

आकाश झरोखे से



1-सेदोका  - पुष्पा मेहरा    

1
शैतान चंदा
सागर  के  आँगन
लहरों की लटों में,
चाँदनी बाँध
आकाश झरोखे से
कौतुक  निहारता ।
2
अजब  रंग
चुपके से  आकर
अँधेरा फैला गया,
ख़ुद जा छिपा
उजाला   भरपूर
धरा को सौंप गया।
3
लहरें सारी
उठीं जो सागर से
तट को पाने बढ़ीं,
एकाग्रमना
कुछ लक्ष्य पा मिटीं
कुछ  भटक गईं
4
आई बरखा
लाई सुहाग- पेटी
धरा को भेंट में दी।
बूँदों  की बेंदी
बाँध के सखी  मेरी
छम- छम नाचे री!
-0-
2-ताँका-कृष्णा वर्मा
1
समझदारी
तो निरी दलदल
खोए जिसमें
नादान बचपन
डूबे मस्ती की नाव।
2
बोल अमोल
शब्दों में बसें प्राण
तुलें संस्कार
अल्फाज़ से ही होती
असली पहचान।
3
कोई भी काम
उठानी हो कलम
या के कसम
सोचना लाख बार
उठाने को कदम।
4
शंका की रेखा
करे चित्त अशांत
लड़ते तर्क
अनुभवहीन से
शब्दों का घमासान।
5
कैसा ये न्याय
सभ्य होने का बोझ
नित्य दबाए
बिना अदालत के
कड़ी सज़ा सुनाए।
6
निज कैद से
करो खुशियाँ मुक्त
सम्मिलित हो
औरों की खुशियों में
बढ़ाएँ खुशी -वंश।
7
डराए डर
जब तक ना उसे
राह दिखाएँ
थामें रहे उँगली
मनमाना नचाए।
8
भोले शब्दों से
कविता चालबाज़
यूँ रचवाए
मन में सेंध लगा
रहस्य बीन लाए।
9
बासी हो चोट
मुस्कुराए उदासी
ख्शे पीड़ा को
दर्द तो सहेली- सी
आदत में शामिल।
10
धरा पे सब
धरा रह जाएगा
है वक्त शाही
करेगा निराधार
करके  धराशायी
 -0-

9 comments:

Kashmiri lal said...

सभी तांका और सेदोका सुंदर । बधाई !

Pushpa Mehra said...

krishna ji 6 va10 no.tanka yathrth paradharit hai. badhai.
pushpa mehra.

Krishna said...

सभी सेदोका बेहतरीन पुष्पा मेहरा जी बधाई आपको!

jyotsana pardeep said...

आई बरखा
लाई सुहाग- पेटी
धरा को भेंट में दी।
बूँदों की बेंदी
बाँध के सखी मेरी
छम- छम नाचे री!
pushpa ji ,yahan jalandhar mein chamacham barish ho rahi hai aur us par ye khoobsurat rachnayen ....man ko sheetalta pahunchaati .... bahut khoob!sadar naman ke saath badhai.

jyotsana pardeep said...

धरा पे सब
धरा रह जाएगा
है वक्त शाही
करेगा निराधार
करके धराशायी।
-0-
krishna ji ,sabhi rachnayen bahut hi pyari hain...man mohak ...par dhara ne to kamaal hi kar diya ...sundar ,sashakt v jeevan ka sachcha .sandesh deti. aadarniya krishna ji ko sadar naman ke saath -saath badhai.

Savita Aggarwal said...

पुष्पा जी और कृष्णा जी आपके सेदोका और तांका बहुत गहन भाव लिए है आप को हार्दिक शुभकामनाएं |

ज्योति-कलश said...

सभी सेदोका और ताँका उत्तम हैं ...
शैतान चंदा , सुहाग पेटी ,समझदारी और ..चालबाज़ कविता बहुत सुन्दर लगे !
आदरणीया पुष्पा जी एवं कृष्णा जी को बहुत बहुत बधाई ..सादर नमन !

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

Ssbhi ek se ek..

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत मनभावन सेदोका और तांका हैं आप दोनों के...बहुत बधाई...|