Saturday, April 11, 2015

मन की डोरी



डॉ सरस्वती माथुर

1
मन की डोरी
जीवन सुधियों से
बाँध पिरोई
फिर देहरी पर
नेह दिया जलाया।
2
नीर न रोको
अविरल नैंनों से
बहने भी दो
मन -नदी गहरी
समा लेंगी यादों को।
3
थाम जो लोगे
जीवन पथ पर
हाथ हमारा
मन-ताल खिलेंगी
कलियाँ कमल की ।
4
तितली- मन
फूलों को चूमकर
रस है पीता
रंग बटोरकर
जीवन पूरा जीता।
5
चाँद - चाँदनी
मधुर संबंधों की
एक है डोरी
नेह का बंधन है-
जानती है चकोरी ।
-0-

8 comments:

Amit Agarwal said...

अतिसुन्दर रचनाएँ !
डॉ. सरस्वती माथुर को शुभकामनायें …

Kashmiri lal said...

Beautiful dream for future and life

Rekha said...

भावपूर्ण सुंदर ताँका ।
बधाई ।

Shashi Padha said...

सुन्दर, भावपूर्ण तांका, सरस्वती जी को बधाई |

Dr.Bhawna said...

Bahut Khub! Hardik badhai...

Manju Misha said...

बहुत सुन्दर, भावपूर्ण तांका….

ज्योति-कलश said...

भावपूर्ण सुन्दर ,मधुर ताँका !

हार्दिक बधाई सरस्वती जी !

प्रियंका गुप्ता said...

भावपूर्ण और मनभावन तांका के लिए हार्दिक बधाई...|