Saturday, November 15, 2014

हम बड़े हो गए



डॉ सरस्वती माथुर  
सेदोका
1
बाल मन भी
फुदक -फुदकके
बचपन था जीता
पंख लगा के
नभ में था उड़ता
सितारों को गिनता l
2
बचपन भी
तितली -सा उड़ता
सपनों के चौबारे
फूलों से रंग
चुनकर था जीता
कभी न रहा रीता l
3
बचपन के 
चंदा मामा खो गए
हम बड़े हो गए
पंख लगाके
चिड़िया बनकर
आजा रे बचपन l 
-0-



2-माहिया
1
कतरा कतरा पानी
बिन तेरे सजना
जीवन है बेमानी |
2
मैं तेरी दीवानी
प्रीत बसी मन में
आँखों में है पानी l
3
कैसे बीते रैना
जब तुम आओगे
तब आएगा चैना
4
चुप चुप तुम रहते हो
गैरों को झूठी
बातें क्यों कहते हो ?
-0-


 

2 comments:

Onkar said...

दोनों रचनाएँ बेहतरीन

Lekhika 'Pari M Shlok' said...

behad sunder