Sunday, October 12, 2014

यादों में रहती हूँ



रचना श्रीवास्तव
1
अब  चाँद निकल आया
तुम  घर आ जाओ
मन मेरा  घबराया ।
2
नैनो में रहते हो
मेरे स्वामी तुम
साँसों में बहते हो  
3
बस इतना कहती हूँ
हर पल तेरी ही
यादों में रहती हूँ
4
मै लाख जनम पाऊँ
तेरी ही बन के
तेरे ही  घर आऊँ ।
5
तू मेरा राँझा है
तेरा- मेरा तो
सुख- दुख सब साँझा है ।
6
नदिया तूफानी है
बहती रहती जो
वो प्रेम  कहानी है ।
-0-


8 comments:

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

वाह! वाह! बहुत ही सुन्दर, भाव विभोर करते हुए माहिया।
करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको रचना जी !

~सादर
अनिता ललित

Savita Aggarwal said...

बहुत सुंदर रचना की है रचना जी |
सविता अग्रवाल "सवि"

Subhash Chandra Lakhera said...

सुन्दर माहिया, रचना जी को हार्दिक बधाई !

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बहुत सुन्दर माहिया. बधाई रचना जी.

ज्योति-कलश said...

समर्पण , प्रेम भरे बहुत सुन्दर ,मोहक माहिया हैं ....बहुत शुभ कामनाएँ रचना जी हार्दिक बधाई !

Krishna said...

भावपूर्ण माहिया....बधाई रचना जी !

प्रियंका गुप्ता said...

प्रेम पगे शब्दों-भावों से पगी इन सुन्दर पंक्तियों के लिए हार्दिक बधाई रचना जी...|

jyotsana pardeep said...

rachna ji aapki rachna bahut hi khoobsurae hai....badhai aapko bahut saari.