Thursday, October 2, 2014

रौशनी की किरण




 डॉ हरदीप कौर सन्धु

सर्द दिन…… थर-थर काँपती धूप  ....... मगर गुलाबी धूप के टुकड़ों को उसकी मीठी दोस्ती -संग निभाते मेरा अन्तर्मन असीम ख़ुशी से भर जाता। उससे जुड़ी दिली साँझ मुझे ख़ूनी रिश्तों से भी अनमोल लगती।  वह अक्सर दूधिया हँसी हँसती मुझे चाव से मिलती। आज किसी अलौकिक प्रसन्ता के उल्लास से भरकार  उसने कहा, " जल्दी ही एक नन्हा फ़रिश्ता मेरी झोली में आने वाला है।" उसी पल स्वाभाविक रूप से मेरा निजी अनुभव बोला," तेरा खिला माथा  तथा चेहरे का नूर तेरी कोख में पलने वाली नन्ही परी के आने की हामी भरता है। "

           छन-छन करता समय अपनी चाल चलता रहा और नन्हे फ़रिश्ते का अपनी माँ की कोख का गुलाबी सफर अब अन्तिम पड़ाव पर है। गुनगुनी  फागुनी धूप ,आज फिर हमारी मुलाकात हुई।  कुछ महीने पहले अनुमानित बात पर उसने पक्की मोहर लगाते हुए कहा, " सच हाँ  सच में ………… एक नन्ही परी हमारे घर आने वाली है !" नई टैक्नॉलोजी के ज़माने में सब कुछ पहले से ही मालूम हो जाता है।

              आज ऐसे लगा जैसे उसके मन के मौसम में फूलों जैसी रस -भीनी महक बिखर गई हो। बहार जैसे खिलते हुए किसी अलौकिक उमंग में भरते हुए  उसने बड़े चाव से अपनी सुंदर परी के स्वागत की पहले से की हुई तैयारी को मेरे सामने लाकर बिखेर दिया। कहीं स्वयं खरीदी छोटी -छोटी गुलाबी फ्रॉक तथा मौजे तो कहीं सात समंदर पार से ऊनी धागों में बुना हुआ भेजा दादी -नानी का मोह-भीगे बचकन्ने। अपने पति की लाई हुई प्यारी सी गुड़िया जब उसने मुझे दिखाई तो लगा जैसे सच में ही दूधिया हँसी से आँगन भर गया हो। शायद वो इस गुड़िया को देखकर अपनी लाडो का चेहरा प्रतिदिन अन्तर्मन में देखती  है।

            ……… आने वाली रौशनी की किरण जैसी परी को मन ही मन में आज भागभरी कहने को मेरा मन कर आया।



खुली खिड़की

रौशनी की किरण

देखूँ आँगन।       

       
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8 comments:

Kamla Nikhurpa said...

नन्ही परी की दूधिया मुस्कान और उसके नाजुक पंखों की ऊंची उड़ान, आपकी सतरंगी कल्पनाओं को साकार करे ... आमीन |

कमला

Shashi Padha said...

भाग्भारी के आगमन की खुशी में धूप ने कितने रंग बदले | बहुत खूब |

शशि पाधा

Manju Gupta said...

शब्दों का चयन से लाजवाब हाइगा मन को छू रहा है .
नमन व बधाई

ज्योति-कलश said...

रौशनी की किरण ने मन को उजालों से भर दिया ...पढ़ते - पढ़ते सुकून की लहर अपने-आप दौड़ गई ..स्वागत है इस नन्ही किरण का ..बहुत बधाई !!!

सविता अग्रवाल 'सवि' said...

डॉ. हरदीप कौर संधू जी ,आपको अनेकानेक बधाई |इतने सुंदर ढंग से नन्ही परी के आने का स्वागत और उसकी तैयारी का वर्णन आपने अपने हाइबन में किया है पढ़ कर मन प्रफुल्लित हो गया |

सविता अग्रवाल "सवि"

sushila said...

बहुत सुंदर !

jyotsana pardeep said...

HARDEEP JI AAPHAMESHA HI BAHUT SUNDER HAIBAN LIKHTI HAI....KHOOBSURAT BHAAVO KE SAATH -SAATH SUNDER SHABD CHAYAN...MAN KO CHPOOTI RACHNA....SADAR NAMAN KE SAATH BADHAI HAI AAPKO .

प्रियंका गुप्ता said...

हाइबन पढ़ते पढ़ते मन जैसे इन भावो के साथ कहीं दूर बह चला...| एक अनोखी खुशी महसूस हुई...| काश ! इस नई टेक्नोलॉजी के ज़माने में किसी नन्ही परी के आगमन की खबर का यूँ ही स्वागत होता रहे...|
बहुत बहुत बधाई और आभार...|