Monday, September 1, 2014

भाव-धारा



1-माहिया
शशि पाधा
1
रुकती ना पहरों में
नदियाँ  जा मिलती
सागर की लहरों में ।
2
पंछी तो जाने ना
सीमा देशों की
नभ से पहचाने ना ।
3
पर्वत की धारा है
पत्थर राह मिले
मन किसने हारा है ।
4
निज पौरुष आँक  लिया
मेघों ने ढाँपा
सूरज ने झाँक लिया ।
5
पथ -पथ में नूर भरे
नन्हा जुगनू भी
अँधियारा दूर करे ।
6
पुरवा ले आती है
खुशबू  चंदन की
कण-कण महकाती है ।
7
सुख- दिन की आस करो
अपने हाथों पर
कुछ तो विश्वास करो ।
8
इच्छाएँ  सपनों सी
पूरी हों न हों
संग रहती अपनों सी ।
9
इन मौन इशारों ने
दरिया बाँध लिये 
दो शान्त किनारों ने ।
10
हाथों की रेखा है
बनती - मिटती है
कर्मों का लेखा है ।
11
कुछ और न कहना है
उमड़े भावों की
धारा में बहना है
-0-
2-ताँका
सविता अग्रवाल "सवि"
1
नीला अम्बर
खुशनुमा मौसम
बहारों  संग
उड़ कर चली वो
भरने नव रंग ।
2
शाखाएं  झुकी
करने को नमन
पत्ते भी हिले
देने सलामी स्वयं
हवा के झोंकों संग
3
ऊँचा पहाड़
मंदिर की घंटियाँ
अनोखी छटा
पथ हुए बीहड़
पर मन है दृढ़ ।
4
गंतव्य दूर
अनजानी- सी राहें
रात अँधेरी
चिराग की रोशनी
दिशाओं का संकेत ।
5
महानगर
भीड़ ही भीड़ यहाँ
भागते सभी
रास्ते में भीड़ भारी
समय न है यहाँ ।
-0-


-0-

5 comments:

Savita Mishra said...

बहुत खुबसुरत ...बधाई आप दोनों जन को

jyotsana pardeep said...

पथ -पथ में नूर भरे
नन्हा जुगनू भी
अँधियारा दूर करे ।
bahut khoobsurat....gagar mein sagar sa.....prernadaaye....sunder sandesh liye mahiya....badhai man ki...sabhi ne man moha...

jyotsana pardeep said...

3
ऊँचा पहाड़
मंदिर की घंटियाँ
अनोखी छटा
पथ हुए बीहड़
पर मन है दृढ़ ।
sahi kaha aapne....sunder sandesh ke saath.....sabhi rachnaye pyari ...par nazar rookti hai jab seekhne ko kuch milta ho..vo bhi itna pyara..badhai ke saath=

Pushpa Mehra said...

b sashi ji va shanti ji mahiya aur tanka bahut sunder rache hain ap dono ko badhai.
pushpa mehra.

प्रियंका गुप्ता said...

सुख- दिन की आस करो
अपने हाथों पर
कुछ तो विश्वास करो ।
बहुत प्रेरक...
इच्छाएँ सपनों सी
पूरी हों न हों
संग रहती अपनों सी
बिल्कुल सच है ये...। खूबसूरत माहिया के लिए बधाई...|

ऊँचा पहाड़
मंदिर की घंटियाँ
अनोखी छटा
पथ हुए बीहड़
पर मन है दृढ़ ।
बहुत बढ़िया...। हार्दिक बधाई...।