Monday, August 18, 2014

मोहक है मुस्कान



 1-सेदोका
कृष्णा वर्मा
1
श्याम वर्ण
मोहक है  मुस्कान
जन्में कृष्णकिशोर
घनांधकार
चमके सौदामिनी
झंझा थी घनघोर ।
2
रूप सलोना
सुन्दर चित्तवन
भरा है जादू टोना
नैन नशीले
मुस्कान अधर पे
है किसका तू छौना।
3
सुन्दरता के
अथाह हो सागर
नैनों में मस्ती छाई
सूरत प्यारी
लगे चंदा नभ में
ज्यों तेरी परछाई।
4
नव यौवन
भरा कलेवर है
दिव्य तेरा शृंगार
राधिका संग
नाचें मुरलीधर
कालिंदी तट पर।
-0-
2-माहिया

डॉ सरस्वती माथुर


1
मुरली जब बजती है
 छवि तब कान्हा की  
नैनन आ  सजती  है।
2
यमुना तीरे डोले
आकुल- सी राधा 
कान्हा- कान्हा बोले ।
-0-
ताँका
डॉ सरस्वती माथुर 
1
राधा अधूरी
घनश्याम के बिना
निष्काम प्रेम
कृष्णमय है मन
चंचल चितवन
2
मुझे न बुला
बाँसुरी तान सुन
गोपियाँ  हँसें
राधा है समझाए
कृष्ण संग मुस्काए
3
राधा बौराए
वंशी की धुन सुन
बावरी डोले
बन में आकुल सी
कृष्णमय हो जाए
-0-

3 comments:

Pushpa Mehra said...

krishna ji va mathur ji ap dono ke sedoka radha krishna ki bhakti se bhare hain badhai .
pushpa mehra.

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

आदरणीया कृष्णा दीदी जी, बहुत सुन्दर रूप-वर्णन किया आपने कान्हा जी का। मन भावविभोर हो गया। अतिसुन्दर सेदोका !!!

डॉ सरस्वती माथुर जी माहिया एवं ताँका दोनों ही बहुत सुन्दर।
आप दोनों को हार्दिक बधाई !

~सादर
अनिता ललित

प्रियंका गुप्ता said...

कई बार कुछ पंक्तियाँ बरबस ही मन को अपने भावो संग बहा ले जाती हैं...| इस भक्तिमय प्रवाह के संग बहना बहुत अच्छा लगा...हार्दिक बधाई...|