Saturday, July 26, 2014

वर्षा -वधूटी



डॉ सुधा गुप्ता
1
दसों दिशाओं
सजी बन्दनवार
सुगन्धि-अभिसार,
वर्षा -वधूटी
आज करके आई
अभिनव शृंगार ।
2
सजी बैठी
नील परिधान में
शोभा अपरम्पार,
दर्पण देख
सुनहली बिन्दिया
लगा ली सुकुमार ।
3
परछन की
प्रकृति सासू-माँ ने
जाती है बलिहार
बच्चों में बाँटे
चाँदी के नए सिक्के
यूँ नज़र उतार ।
4
शुभ प्रवेश
स्वागत ! भूमि-श्रिया!
अल्पना सजी द्वार
खेत झूमते :
तव शुभ चरण
भर देंगे कोठार ।
5
दूर भगा दी
अकाल परछाई
अल-नीनो की मार
हे मनोहरा!
अन्तर्मन से मानें
तुम्हारा उपकार
-0-
[ परछन= ( प्रच्छन्न)बुरी  नज़र या किसी अहितकारी प्रभाव से मुक्त करने के लिए दीपक चारों ओर घुमाकर दूल्हे की आरती करना। ]

8 comments:

sushila said...

प्रकृति के सभी बिंब बहुत ही मनोहारी हैं। सुधा दीदी को सुंदर सृजन के लिए साधुवाद।

sushila said...

दसों दिशाओं
सजी बन्दनवार
सुगन्धि-अभिसार,
वर्षा -वधूटी
आज करके आई
अभिनव शृंगार ।

अत्यंत मोहक बिंब ! वर्षा का मानवीकरण अत्यंत मनोहारी है।

नमन दी को।

ऋता शेखर मधु said...

बहुत सुन्दर सेदोका सुधा दी के...शानदार सीखने लायक बिम्ब-प्रस्तुति...सादर प्रणाम व बधाई !!

ज्योति-कलश said...

बहुत सुन्दर ,मोहक बिम्ब हैं ....

दर्पण देखती " वर्षा वधूटी " ,परछन करती सासू माँ ,बच्चों में बंटते चाँदी के सिक्कों की मनोहर कल्पनाएँ मन को अनमोल खजाने से भर गईं ....बहुत आभार दीदी ..सादर नमन !

ज्योत्स्ना शर्मा

jyotsana pardeep said...

varsha ka sunder manvikaran ,sabhi bimb manmohak, anuthe kalpnao se saje sedoka....sudha ji apko sadar naman saath hi abhaar in anmol ratno ke liye .

Subhash Chandra Lakhera said...

वर्षा ऋतु पर बेहतरीन सेदोका सृजन के लिए डॉ सुधा गुप्ता जी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं - सुभाष लखेड़ा

Dr.Bhawna said...

charon or bikhri prkrti ki chata ko naman...

प्रियंका गुप्ता said...

इनको पढ़ के तो बस यही शब्द निकलता है मुँह से...अप्रतिम...|
हार्दिक बधाई...|