Saturday, June 28, 2014

सच-सच बतलाना




शशि पाधा
1
भरमाए रहते हो
बरसो तो जानें
बस छाए रहते हो ।
2
कुछ पल को तड़पोगी
गर हम बरस गए
चुनरी में भर लोगी ।
3
कुछ समझ नहीं आता
सच-सच बतलाना -
बिजुरी से क्या नाता ?
4
मुझको बिजुरी भाती
नभ की गलियों में
हम बचपन के साथी ।
5
थोड़े से काले हो
धूप बताती है
कुछ भोले- भाले हो ।
6
हम तो बंजारे हैं
इत-उत फिरते हैं
औरों से न्यारे हैं ।
7
क्यों रोज़ सताते हो
इक पल दिख जाते
दूजे छिप जाते हो ।
8
यह खेल पुराना है
आँख मिचौनी को
सबने पहचाना है ।
9
यह बात  तभी जानूँ
मन के आँचल में
छिप पाओ तो मानूँ ।
10
इस पल को तरस गए
आँखें मींचो तो
लो हम तो बरस गए ।
11
आँखों में भर लेंगे
तुझको मोती- सा
पलकों पे धर लेंगे ।
12
बूँदें जो झरती हैं
आँखों की झीलें
हमसे ही भरती हैं ।
13
सावन को जाने दो
तुम तो रुक जाना
त्योहार मनाने दो ।
14
लो कैसे जाएँगे
डोरी प्रीत- भरी
हम तोड़ न पाएँगे।
-0-

8 comments:

ज्योति-कलश said...

वाह वाह ...एक से बढ़ कर एक माहिया हैं दीदी ...बेहद सरस !
हार्दिक बधाईयाँ !!

Savita Aggarwal said...

शशि जी सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे परन्तु हाइकु १२ बूँदें जो झरती हैं....गहरे भाव लिए हुए है |बधाई |

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

बहुत सुन्दर ! बरसात की बूँदों से सजे सभी माहिया दिल लुभा गए
हार्दिक बधाई शशि दीदी !

~सादर
अनिता ललित

Dr.Anita Kapoor said...

वाह ...एक से बढ़ कर एक माहिया हैं ...
हार्दिक बधाई....

Shashi Padha said...

आप सब का हार्दिक आभार |

सस्नेह,

शशि पाधा

Shashi Padha said...

आप सव का हार्दिक आभार

सस्नेह,
शशि पाधा

Savita Aggarwal said...

शशि जी, मुझे खेद है की मैंने ग़लती से माहिया को हाइकु लिख दिया है |कृपया क्षमा करें |

प्रियंका गुप्ता said...

क्या बात है...इन माहिया में जैसे जुगलबंदी का भी आनंद आ गया...| हार्दिक बधाई...|