Tuesday, May 27, 2014

अनिद्रा


डॉ सुधा गुप्ता
1
पिछ्ले कुछ  दिनों से फिर अनिद्रा से भयंकर पीड़ित हूँ……लेनी पड़ती है नींद की गोली। खाकर भी मुश्किल से दो या ढाई घण्टे सो पाती हूँ । उसके  बाद फिर वही करवटें……करवटें……
आखिर मेरे हिस्से ही क्यों हैं ये मुसीबतें ?
          नींद से दोस्ती
          कभी फूली न फली
          दुश्मनी रही
(1980)
-0-
2
कल कॉलिज से लौटते हुए फिर से टाइम लेकर  डॉक्टर ऐरन  से मिलती आई।
ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है । कॉलिज का तनाव घर की विषम परिस्थितियाँ ….कभी सिर दुखता है , कभी पेट दुखता है नियमित औषधि के बाद भी ब्लड प्रेशर नियन्त्रित नहीं होता  क्या करूँ ?
          बचपन से कबी मस्त नींद , बेफ़िक्र नींद तो आई ही नहीं, पर फिर भी , ऐसा तो न था काम चलाऊ तो सोती ही थी ! अब तो नींद से पूरी अदावत है
          खुजली बूटी
          किसने छुपकर
          रक्खी बिस्तर ।
(1980)
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12 comments:

त्रिवेणी said...

आज से 34 वर्ष पहले लिखे सुधा जी के ये हाइबन आज भी उतने ताज़ा हैं , अहसासों की गहराई लिये हुए। जिस प्रकार समुद्र की कोई सीमा नहीं होती… वह विशाल, गहरा और व्यापक होता है उसी तरह सुधा जी की लेखनी है - उनके अहसासों की पैमाइश और गहराई की अभिव्यक्ति के लिए मेरे पास कोई लफ्ज़ नहीं बल्कि ज़ज्बात का सैलाब है, जिसे उन्होंने जिया है, महसूस किया है। जिन्दगी इन्हीं खट्टे-मीठे तजुर्बों की कहानी बन जाती है। मुझे सुधा जी की लेखनी ने हमेशा प्रभावित किया है।इन हाइबन में चाहे सरल भाषा में बात कही गई है ;लेकिन बहुत गहरी है ये बात। जो हाइबन की विशेषता को स्पष्ट भी करती है। ये हाइकु 'अनिंद्रा' को और गहराई तक ले गया ................ खुजली बूटी किसने छुपकर रक्खी बिस्तर।
डॉ हरदीप सन्धु

Pushpa Mehra said...

sudha didi ji apake dvara likhe haiban kisi ichhit ko na pa sakane se utpann bechaini ko vyakt karate jeevan ki jatilataon ko anidra ke madhyam se vyakt kar raha hai .bhav - nirupan atyant gahan hai.didi apako badhai va lekhani ko naman.
pushpa mehra.

Dr.Anita Kapoor said...

सुधा जी की लेखनी ने हमेशा प्रभावित किया है। बधाई

Krishna said...

गहन संवेदन, उत्तम हाइबन-- आदरणीय सुधा जी बहुत-२ बधाई !

Rachana said...

सुधा जी आपका लिखा सदा ही सुन्दर लगता है आप हम जैसों की प्रेरणा श्रोत हैं। आपने जो लिखा है उसको पढ़ कर लगा की आप की सोच में कितनी गहराई है l आपकी भाषा शैली की मै बहुत बड़ी प्रशंशक हूँ. भगवान आपको सेहतमंद रखे यही प्रार्थना है
सादर
रचना

ऋता शेखर मधु said...

हाइबन....प्रभावित करने वाली विधा...संवेदनशील हाइबन के लिए आदरणीय सुधा दीदी को बधाई !!

jyotsana pardeep said...

adarniya sudhji ko v unki lekhni ko naman ...gahri sooch liye ...eak peeda ko ... badi hi gahanta se prastut karta....samvedansheel ...haiban...bahut bahut..badhai...sudha ji

मीनाक्षी said...

संकोच नहीं कि हाइबन की जानकारी मुझे यहाँ पहली बार मिली.... बहुत प्रभावशाली.... आभार

Manju Gupta said...

कालजयी हाइबन के सुधा दीदी को हार्दिक बधाई .
ईश से दुआ करती हूँ , आप की अस्वस्थता को दूर करे .

ज्योति-कलश said...

आदरणीया सुधा दीदी की आत्म कथा पढ़ रही हूँ ..उनकी लेखनी अभिभूत कर देती है मुझे ...एक -एक भाव ,मनोदशा जैसे साकार हो उठते हैं उनकी कलम से ...कभी मुस्कुराने और कभी आँसुओं को झर जाने के लिए विवश कर देती है उनकी अभिव्यक्ति ...ऐसे ही यह दोनों हाइबन .....अनिद्रा को इस तरह कह गए कि जैसे बस सबके हो गए !!

दीदी के प्रति सादर नमन और बहुत शुभ कामनाओं के साथ .....

ज्योत्स्ना शर्मा

प्रियंका गुप्ता said...

आदरणीय सुधा जी जिस विधा को हाथ लगा देती हैं वो पूरी गहराई के साथ बिलकुल जीवंत हो उठती है...| इतने बरस पहले लिखे गए हाइकु हाइबन के रूप में जब सामने आते हैं तो मानो कितना कुछ कहा-अनकहा सामने आ जाता है...|
हार्दिक बधाई और आभार...|

त्रिवेणी said...

डॉ सुधा गुप्ता जी के हाइबन पर डॉ कुँवर दिनेश सिंह जी की टिप्पणी:
Sundar haibun ke liye badhai!!! Aaj ke jiwan ki vyastata evam bechaini ko ye haibun bhali bhanti ukerate hain.