Sunday, May 11, 2014

माँ तो बस मुस्काती !

अनिता ललित
1
आँखों में है सावन
दिल ममता-आँगन
माँ तू कितनी पावन।
2
हर दुःख को सह जाती
उफ़ न कभी करती
माँ तो बस मुस्काती !
3
आँचल में हैं सारे 
मुन्ने के सपने
क्या चन्दा , क्या तारे। 
4
जिस घर माँ मुस्काती
ईश्वर की बाती
कण-कण नूर खिलाती।
5
माँ पहला आखर है
नींव बने घर की
माँ  ऐसा पत्थर  है 
 6.
सबको जीवन देती
 सहती धूप कड़ी
अपने सपने पीती  ।
7
कैसा दुःख क्या चिंतन
दर्द सभी भागें
माँ तो हल्दी-चन्दन।
8.
रिश्तों को वो सीती
छुपकर है  रोती
माँ घुट-घुट कर जीती।
9.
जीवन भर ना हारी
अब जब उम्र ढली
अपने बदलें पारी !
10
अपने दिल में पाती 
बेटी की धड़कन
माँ की प्यारी साथी ।
11
माँ के भीगे नैना
जो ना पढ़ पाए
उसका क्या है जीना

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9 comments:

Krishna said...

मातृ दिवस की बधाई !
सभी माहिया लाजवाब और यह तो बहुत मन भाया
सबको जीवन देती
सहती धूप कड़ी
अपने सपने पीती ।........बहुत-२ बधाई अनीता जी !

jyotsana pardeep said...

ma par likhe mahiya hiy mein sheetalta.... bhar gaye paancva baar baar padha.......bhaav purn v khoobsurat sabhi mahiya....badhai ke saath

Pushpa Mehra said...

anita ji apke sabhi mahiya bahut achhe like hain. bahut badhai.
pushpa mehra.

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

कृष्णा जी, ज्योत्स्ना प्रदीप जी, पुष्पा जी... सराहना एवं प्रोत्साहन देने के लिए आप सभी का ह्रदय से धन्यवाद ...आभार !!!

~सादर
अनिता ललित

Dr.Bhawna said...

hrdysparshi rachnayen , hardik badhai...

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

हार्दिक धन्यवाद भावना जी !

~सादर

ज्योति-कलश said...

बहुत प्यारे माहिया हैं अनिता जी ..क्या कहें बस मन मोह गए ...:)

हार्दिक बधाई !!!!

प्रियंका गुप्ता said...

बहुत प्यारे माहिया...हार्दिक बधाई...|

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

ज्योत्स्ना जी, प्रियंका जी आपका हार्दिक धन्यवाद !

~सादर