Thursday, March 20, 2014

दिल की दहलीज़

डॉ भावना कुँअर
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ख्याल उनका
दिल की दहलीज़
लाँघकर जो आया,
सूखा गुलाब
पन्नों से निकलके
खुशबू भर लाया ।

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3 comments:

Tushar Raj Rastogi said...

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - आराधना पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

Dr.Bhawna said...

Bahut bahut aabhar aapka..

Pushpa Mehra said...

yad par likha sedoka bahut hi achha hai.bhavana ji apako bahut badhai.
pushpa mehra.