Friday, February 7, 2014

आया बसंत

कृष्णा वर्मा
1
आया बसंत
छलका मधुरस
हैं तृष्णाएँ अनंत
जर्जर-काया
बूढ़े बरगद पे
यौवन चढ़ आया
2
लहर जाएँ
क्षितिज की झालरें
हवा सनसनाए,
कर्ण मधुर
बजें वाद्य पत्तों के
शाखें गुनगुनाएँ
3
अम्बर पर
छिटकी है चाँदनी
हवाओं में ताज़गी
वादी महकी
साँसें गुनगुनाईं
ऋतु ले अँगड़ाई।
4
आम्रतरु पे
इतराए जो बौर
मन भी बौरा गया
पुष्प महके
मोगरे की गंध से
सराबोर है हवा ।
5
लुकी रजाई
सिमटा जो कोहरा
आया बसंत छोरा
रंग- धमाल
टपक रही खुशी
फूलों –लदी डालियाँ
6
उभर रही
शिखर अधर पे
नदिया की मुस्कान
द्वार उतरी
ललित लिका- सी
लेखनी की कल्पना
7
नेह से भरी
रेशमी छुअन से
भीगने लगा मन
महकी फिज़ा
कोंपलों की मुस्कानें
हर्षित तरुदल।
-0-


3 comments:

प्रियंका गुप्ता said...

लुकी रजाई
सिमटा जो कोहरा
आया बसंत छोरा
रंग- धमाल
टपक रही खुशी
फूलों –लदी डालियाँ ।

वसंत के तरह ही सुन्दर हैं ये सेदोका...बधाई...|

ज्योति-कलश said...

सुन्दर वसंत वर्णन ..रस छलकाते बहुत मोहक सेदोका ...हार्दिक बधाई कृष्णा जी |

सादर !
ज्योत्स्ना शर्मा

jyotsana pardeep said...

basant ki sundarta liye mohak sedoke ....aapke ko dhero badhai krishna ji !!!!!!.