Monday, October 7, 2013

कोकिल फिर गाएगा

कृष्णा वर्मा
1
मौसम ने पेड़ ठगे
शाखा उन्मन- सी
जीना अब झूठ लगे
2
पात हुए संन्यासी
तु की भौंह चढ़ी
छाई घोर उदासी
3
तरु दल भरमाए हैं
रंग खिज़ाओं ने
सब आज चुराए हैं
4
रंगों का ना मेला
पात उदास कहें-
अवसान भरी बेला
5
पतझड़ जो ना होता
शाखें निर्वसना
तरु यौवन ना खोता
6
कोकिल फिर गाएगा
सूनी डालों पे
यौवन मुस्काएगा ।

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5 comments:

manukavya said...

मौसम ने पेड़ ठगे
शाखा उन्मन- सी
जीना अब झूठ लगे..... jeevan me aksar aise kshan aate hain jab jeena jhooth lagne lagta hai .... sundar !

KAHI UNKAHI said...

पात हुए संन्यासी
ॠतु की भौंह चढ़ी
छाई घोर उदासी ।
बहुत सुन्दर...बधाई...|

प्रियंका

डॉ. जेन्नी शबनम said...

अहा! बहुत खूबसूरत, बधाई कृष्णा जी.

ज्योति-कलश said...

बहुत भावभरे माहिया ....
मौसम ने पेड़ ठगे
शाखा उन्मन- सी
जीना अब झूठ लगे ।...सुन्दर अभिव्यंजना !...बधाई आपको !!

Sudershan Ratnakar said...

बहुत सुंदर माहिया,बधाई