Saturday, September 14, 2013

हिन्दी इक डोर हुई !

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 
1
कहना है हिन्दी का 
रखना मान सदा 
ममतामय बिंदी का !
2
तुम पर अभिमान करें 
सरस, मधुर हिन्दी
हम मन से मान करें !
3
तम में फिर भोर हुई 
अलग-अलग मनके 
हिन्दी इक डोर हुई !
4
सुर-साज सभी सजते
गीत-ग़ज़ल हिन्दी
हर एक दिशा बजते !
5
बढ़कर , ना ठहरेगा 
परचम हिन्दी का 
दुनिया में फहरेगा !
6
मन से अरदास करें 
तन हिन्दी ,मन भी 
मंगल हो आस करें !

-0-

7 comments:

KAHI UNKAHI said...

सार्थक माहिया के लिए बहुत बधाई...|

प्रियंका

तुषार राज रस्तोगी said...

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - हिंदी को प्रणाम पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

shashi purwar said...

bahut sundar sarthak mahiya jyotsana ji

Pushpa Mehra said...

jyotsna ji apke sare mahiya bahut hi achhe hain hindi
basha ka sutra sabse jude yahi kamana hai. badhai.
pushpa mehra.

ज्योति-कलश said...

aa Pushpa Mehra ji ,shashi purwar ji evam priyanka ji ..hriday se aabhaar aapakaa !

aa Kamboj bhaai ji ,bahan Hardeep ji evam Tushar Raj Rastogi ji ...meree bhaavaabhivyakti ko sneh sammaan dene ke liye bahut bahut dhanyawaad !

ज्योति-कलश said...

aa pushpa mehra ji ,shashi purwar ji ,Tushar ji evam priyanka ji ...sundar prerak upasthiti ke liye hriday se aabhaar !

saadar
jyotsna sharma

आशा जोगळेकर said...

सुंदर। कविता और कथा ही नही विज्ञान और तकनीक भी हिंदी में आये और अपनायी जाये।