Wednesday, September 4, 2013

दीया एक जला

डॉ सतीशराज पुष्करणा
1
तूफ़ानों से क्या भागे
जो लेटा हरदम
शीत लहर के आगे ।
2
कैसे भी घेरें तम
दीया एक जला
टल जाएगा हर गम ।
3
जो गाल बजाते हैं
जीवन में भी वो
कुछ कर ना पाते हैं ।
4
कोशिश हमने की थी
चोटी को छू लें
राह भले टेढ़ी थी ।
5
कैसे भूलूँ उसको
भीगी आँखों से
देखा जिसने मुझको

-0-

5 comments:

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (05-09-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 107" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

ज्योति-कलश said...

कैसे भी घेरें तम
दीया एक जला
टल जाएगा हर गम ।....सुन्दर भावों का उजाला फैलाते मधुर माहिया ....हार्दिक बधाई ...नमन !

सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

Manju Gupta said...

बढ़िया रचना .

बधाई

रश्मि शर्मा said...

बहुत खूब..

KAHI UNKAHI said...

वैसे तो सभी माहिया बहुत प्रभावी हैं, पर ये दोनों खास तौर से भाए...
कैसे भी घेरें तम
दीया एक जला
टल जाएगा हर गम ।

कोशिश हमने की थी
चोटी को छू लें
राह भले टेढ़ी थी ।
हार्दिक बधाई...|

प्रियंका