Thursday, September 12, 2013

घनी परछइयाँ

1-डॉ भावना कुँअर
1
सर्द रातों में
गरम चादर -सी
लिपटी क्यूँ रहती
अतीत की ये
घनी परछयाँ
देती रुसवायाँ।
2
घोलें मिस्री -सी ,
कभी कड़ुवाहट,
बीते हुए कल की;
परछायाँ
खिली ,कभी बिखरी
जैसे अमरायाँ।
3
नन्हीं कलियाँ
खिलने को आतुर
छोड़ती जाएँ पीछे
बचपन की 
यूँ यादों में लिपटी
ढेरों परछायाँ।
4
तेरी थी छाया
छोड़ अँगना चली
सिसकियों में गूँजी,
मैके की गली
अरमानों से लदी
डोली निकल पड़ी।
 -0-
2-अनिता ललित
1
संग चलती
कर्मों की परछाईं
जीवन में हमारे,
सुख या दुख
पहन इतराती
एक पल ना छिपती!
2
धूप या छाँव          
कभी साथ ना छोड़े
स्नेहाशीषों  के साए
माँ की ममता
हर तूफाँ  से लड़े
कभी पीछे ना हटे
-0-
3-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
1
उर कम्पन
निर्मल ज्यों दर्पन
भावों भरी मिठास,
सुख-दु:ख-से
सदा साथ रहेंगे
बनके परछाई।
2
मन -सौरभ
करता सुरभित
प्राणों की अँगड़ाई,
भाव-डोर  से
छाया-सी बँधी तुम
जीवन अमराई।
3
बोल तुम्हारे
बने शीतल छाया
छतनार नीम की ,
जीवन खिला
शब्दों का मधुरिम
स्पर्श मिला मन को ।
4
छलती छाया
सगे-सम्बन्धी -जैसे
जब दुर्दिन आते ,
मिलता कोई
हमको  मीत साँचा
जो मन को भी  बाँचे
-0-

8 comments:

sunita agarwal said...

wahh sabhi sedoka .bhawpurn ..anita ji bhawna ji kamboj bhaiya ..ap sabhi ko haardik badhayi .. :)

jyotsana pradeep said...

bhavna ji,anita ji aur bhaisahab...aap sabhi ke sedoko me parchai bhi sajiv ho uthi hai....ati sundar!!!!

Krishna said...

बेहतरीन सेदोका....आप सभी को हार्दिक बधाई!

Pushpa Mehra said...

chhaya shabd ke bhavpurn nirupan ne pathika ko vartman, atiit adise judiduniya mein la bithaya hai.badhai shabd
chhoa ta ho gaya hai.
pushpa mehra.

.

Rachana said...

sadoka hai ya bhavon ka sagar ................man ko chhute ek ek shbd
anita ji bhawna ji aur bhaiya kamboj ji ko hardik bhadhai
rachana

Manju Gupta said...

बेहतरीन साहित्यिक गहराइयों से ओत-प्रोत सभी सेदोका .

बधाई .

ज्योति-कलश said...

एक से बढकर एक अनुपम सेदोका हैं ...सुन्दर मधुर भावों की अमिट परछाइयाँ तीनों रचनाकार छोड़ गए यहाँ ...हम भी प्रयास करेंगें छूने का :)
हार्दिक शुभकामनाएँ ...सादर नमन !

KAHI UNKAHI said...

बहुत सुन्दर सेदोका हैं सभी...मनभावन...|
सबको हार्दिक बधाई...|

प्रियंका गुप्ता