Wednesday, September 11, 2013

रिश्तों के अनुबन्ध



1-शशि पाधा
1
तुम और मैं
कल तक थे जैसे
दर्पण  प्रतिबिम्ब
बंधन टूटे  
चहुँ ओर बिखरे
रिश्तों के अनुबंध  
2
छाई घनेरी
तरुवर की छाया
पीहर याद आया ,
ममता -भरा
डार डार शीतल
आँचल लहराया
3     
ऊँचा -सा तरु
आकाश छूता हुआ
हवा में उड़ता -सा  
छाया विहीन
ना शीतल हवाएँ
किस कारण खड़ा
  4
परछाइयाँ
संग संग रहतीं
संग - संग चलतीं
बाल सखा- सी
डाले गलबाहियाँ
जीभर के हँसती ।
-0-
2-कृष्णा वर्मा  
1
दीप शिखा तू
प्रज्वलित दीप की
मैं हूँ उसकी छाया
दीप ओट से
झाँक जो तेरा रूप
मैनें आनन्द पाया।
2
करती मूक
प्यार भरे शब्दों को
घृणा की परछाई,
जुड़ने ना दे
दिल से दिल के तार
रही खोदती  खाई।
3
लिपटी रही
मेरे मर्म से सदा
माँ तेरी स्निग्ध छाया
जब भटकी
अहसास ने तेरे
रस्ता नया दिखाया।
4
यादें निगोड़ी
दिल के कमरे में
परछाई -सी डोलें
तड़पा जाएँ
बीती  बातों से
जब गर्द उड़ाएँ।
-0-
3- पुष्पा मेहरा 
1
 ताप से जली
 मैं पथिक दूर की
 कहीं छाया न मिली,
 तपती  रही
 ठान लिया  मन में
 छोड़ूँ वाणी के बाण ।
2
 वरद - हस्त
 माँ ने शीश पे रखा
 मिली शीतल छाया, 
 सुख था मिला
ममता सघन थी
था मिटा ताप सारा ।
3
 लक्ष्य ले चली
तलाशती प्रकाश
अँधेरों में खोई थी,
मिली रोशनी
मंज़िल छूने बढ़ी
परछाईं से डरी।
4
माँ धरा सी
प्रतिमूर्ति त्याग की
सदा खिली रहती,
नेह वारती
सुख-सुधा लुटाती
दुख-विष पी जाती ।
-0-
4-मंजु गुप्ता
1
चर्चा उनकी 
चर्चित हो रही थी 
जग रंगमंच पै 
लम्हों का नूर 
चलचित्र बनके 
प्रतिबिंबित होता । 
2
दुल्हन बनी 
माँ - पिता की लाडली 
करें क्रीड़ाएं खूब 
मुस्काते होंठ 
भरे घर में मोद 
छाया जो शैशव की   
3
हुई बड़ी मैं 
धूप  - छाँह   के संग
प्रेम- ज्योति जलती 
कृष्ण पक्ष की 
काली रातों में तुम 
पूनों बनके आए । 
4
प्रेम- छाया में 
वसंत था खिलता 
बहकी थी पवन 
ऋतु क्यों रूठी ?  
दिलों में लाई तूफां 
खिल न पाया प्यार . 
-0-
5-जीतेन्द्र सिंह "नील"
1
साँसे थमी -सी
जिन्दगी है घुटन
छाया तलाशता हूँ ,
तेरे प्यार की
राहे हैं काँटो -भरी
फूल जैसे पाँव हैं !
2
मन वैरागी
मिली ना अब तक
वह प्रेम  डगर
तरु तो खड़ा
पर बिन पात के  
कैसे मिलेगी छाया !
-0-

7 comments:

ज्योति-कलश said...

छाया में भी कविमन क्या क्या देख लेता है ..अद्भुत भाव लिए सेदोका हैं ..बहुत बहुत बधाई ..आ कृष्णा जी ,जीतेंद्र सिंह "नील "जी ,पुष्प मेहरा जी ,मंजु गुप्ता जी एवं शशि पाधा दीदी

सादर !
ज्योत्स्ना शर्मा

renuchandra said...

आ. कृष्णा जी ,जीतेंद्र सिंह "नील "जी ,पुष्प मेहरा जी ,मंजु गुप्ता जी एवं शशि जी आपके सभी सेदोका बहुत ही अच्छे एवं भाव पूर्ण लगे।आप सभी को बधाई व शुभकामनाऐं ।

Manju Gupta said...

त्रिवेणी परिवार का धन्यवाद देती हूँ कि मैं साहित्य की सेदोको , हाइकु , तांका आदि कलाओं से परिचित हुई और सीखने को मिला . जब मेरा लेखन का प्रयास यहाँ प्रकाशित होता है तो मन की खुशी के साथ कलम की सफलता का महत्त्व भी पता लगता है .
सभी रचनाकारों की लेखनी अद्वितीय है . गागर में सागर भर देते हैं .
' परछाई ' विषय पर सभी की कल्पनाएँ सराहनीय है . बधाई के साथ .

गागर में सागर भर देते हैं .

Pushpa Mehra said...

tum aur main,kal tak ek the jaise, darpan pratibimb.....,
karti muuk pyar bhare shabdon ko ghrina ki parchhai.....,
prem-chhaya mein basant tha khilta.....,
man vairagi....,
shashi padha ji,krishna ji,manjuji ,neel ji ap logon ke
sedoka bahut hi bhavpurn hain. badhai.
pushpa mehra.

pardeepsharma said...

sabhi sedoke bohot hi bhaavpurna aur sundar hai.....chaya ko alag alag roopon me paribhashit karne ke liye aap sabko badhai!!!!:) :)

jyotsana pradeep said...

sabhi ke haiku bohot bhaavpurna hai....aap sab ne chaya ko alag alag roopon me bohot acche se paribhashit kiya ...sabhi ko hardik badhai!!!!

jyotsana pradeep said...

sabhi ke haiku bohot bhaavpurna hai....aap sab ne chaya ko alag alag roopon me bohot acche se paribhashit kiya ...sabhi ko hardik badhai!!!!