Tuesday, August 20, 2013

भाई है दूर

सुदर्शन रत्नाकर

भाई है दूर
आने में मज़बूर
छोटी बहना
राह है निहारती
आएगा भाई
सूनी -सूनी आँखों में
जलाए बैठी
दीपक आशाओं के
नेह के तार
करते इंतज़ार
कब आओगे
राखी बँधवाओगे
सीमा पास से
संदेश भिजवाया -
मुझे याद है
राखी का त्योहार है
दूर हूँ तो क्या
मन तेरे पास है
मेरी बहना
मैं बहुत ही जल्दी
घर आऊँगा
राखी बँधवाऊँगा
वह दिन भी
त्योहार हो जाएगा
परिस्थितियाँ
बदलती रहतीं
एक पल भी
उदास मत होना
मेरी नन्ही बहना ।

-0-

4 comments:

ज्योति-कलश said...

घर आऊँगा
राखी बँधवाऊँगा
वह दिन भी
त्योहार हो जाएगा....सचमुच ....बस बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...बहुत बधाई ....शुभ कामनाएँ !!
सादर !

Krishna said...

बहुत सुन्दर चोका....बधाई!

Subhash Chandra Lakhera said...

रक्षा बंधन के पावन त्यौहार से जुड़ा आपका चोका बहुत सुन्दर हैं। आपको रक्षा बंधन की शुभकामनाएं!

KAHI UNKAHI said...

दिल को छूने वाला खूबसूरत चोका के लिए बहुत बधाई...|
प्रियंका