Monday, August 12, 2013

कौन यहाँ पराया ?

  
1. अपना - पराया-सुभाष लखेड़ा
 कौन अपना
कौन यहाँ पराया
कैसे बताऊँ 
चेहरे के भावों को 
कैसे छुपाऊँ
नाराज मत होना
मुझे न आता 
अभिनय करना 
झूठ को सच
और सच को झूठ
बनाते कैसे  
आता नहीं है मुझे
दिल दुखाना
बातों को उलझाना  
मुझे आता है - 
हँसना -मुस्कराना
दर्द बाँटना 
सच बात करना
धोखा न देना 
अपना या पराया
कौन है यहाँ
न पहले पता था 
न ही आज पता है।
-0-
2.  धर्म का मर्म 

इंसानियत
सबसे बड़ा धर्म
यदि समझो 
इसमें छुपा मर्म
ईश्वर कहे
तुम सब मेरे हो 
भाई -भाई हो
फिर क्यों लड़ते हो 
क्या मिलता है
यूँ खून बहाने में
एक दूजे का 
कौन -सा धर्म कहे 
अन्याय करो 
कौन- सा धर्म कहे
अन्याय सहो 
कृष्ण ने यही कहा-
पाप से लड़ो 
लड़ना जरूरी हो 
तो असमंजस क्यों।
-0-
पुष्पा मेहरा के माहिया
1
तूफ़ाँ जब हैं आते
मन जग का रोता
सपने भी खो जाते।
2
मन छल-छलके जातीं
सब बातें मन की
रग-रग को तड़पाती ।
3
जीवन का रस पी लें
दो पल का मेला
आओ हँसके  जी लें

-0-

7 comments:

shashi purwar said...

pushpa ji sabhi mahiya cche lage sundar bhav ukere hai aapne ,hardik badhai aapko

subhash ji aapke dono choka acche lage hardik badhai aapko bhi

Pushpa Mehra said...

subhash lakheda ji, kaun apna....kaun yahaan paraaya
bhed bataanaa hi to mushkil hai. kewal swadharm karte HI JAANA HOGA. dono choke bahut hi prerna dayak hain. Badhaai

pushpa mehra

Subhash Chandra Lakhera said...

" जीवन का रस पी लें / दो पल का मेला / आओ हँसके जी लें ।"
Behad khoobsoorat Mahiya....Iske bhaav smriti men lambe samay tak maujood rahenge ! Pushpa ji, Apko sabhee behatraeen Mahiya srijan hetu hardik Badhai !

sunita agarwal said...

@subhabh ji apne dono choke dil me gahre utar gaye ,,, samayik or sarthak .. badhayi ..

@pushpa ji --- " जीवन का रस पी लें / दो पल का मेला / आओ हँसके जी लें ।"
jiwan darsan se bharpur ye mahiya vishesh rup se prabhawit kar gaya .. :)

ज्योति-कलश said...

बहुत सरल शब्दों में गहन अभिव्यक्ति करते चोका हेतु बहुत बधाई ......आ सुभाष लखेड़ा जी के प्रति ..

जीवन का रस पी लें
दो पल का मेला
आओ हँसके जी लें ।....सुन्दर सन्देश देता बहुत सुन्दर माहिया ...बहुत बहुत बधाई आ पुष्पा मेहरा जी !

सादर
ज्योत्स्ना शर्मा


KAHI UNKAHI said...

सुभाष जी के दोनों चोका बहुत अच्छे हैं...पर कौन अपना, कौन पराया ज्यादा भाया...| बधाई...|
पुष्पा जी के माहिया बहुत भावप्रवण लगे...खास तौर से यह..
तूफ़ाँ जब हैं आते
मन जग का रोता
सपने भी खो जाते।
बधाई...|
प्रियंका गुप्ता

Subhash Chandra Lakhera said...

शशि पुरवार जी ,पुष्पा मेहरा जी , सुनीता अग्रवाल जी , ज्योत्स्ना शर्मा जी , प्रियंका गुप्ता जी - चोका पसंद करने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया।

" त्रिवेणी " में प्रकाशनार्थ डॉ हरदीप कौर जी एवं रामेश्वर काम्बोज जी को बहुत -बहुत धन्यवाद!