Saturday, July 6, 2013

आँखों में नमी

प्रियंका गुप्ता
1
तूने ही मुझे
मुझसे मिलवाया
जीना सिखाया;
दुनिया से हार क्यूँ
खुद हुआ पराया ?

2
आँखों में नमी
चेहरे पे मुस्कान
देख के जाने

दिल का सब हाल
दोस्त की पहचान ।
-0-
सुदर्शन रत्नाकर
1
प्रकृति रुष्ट
लहरों का तांडव
कितना भयानक
टूटे हौंसले
 छलछलाती आँखें
बह गये सपने ।

-0-

5 comments:

Subhash Chandra Lakhera said...

प्रियंका जी के हाइकु और सुदर्शन जी का सेदोका पढ़कर फ़िराक जी के शब्दों में " दिल को कई कहानियाँ याद आ के रह गई " और आँखों में नमीं आना स्वाभाविक था। मन को कहीं गहराई से छूने वाले शब्द ! लेखक द्वय बधाई स्वीकार करें !

KAHI UNKAHI said...

प्रकृति की विनाशलीला का बड़ा मार्मिक चित्रण है सुदर्शन जी के सेदोका में...|
मेरे तांका को स्थान देने के लिए बहुत आभार...|

Anita (अनिता) said...

प्रियंका जी के ताँका तथा सुदर्शन रत्नाकर जी का सेदोका .... मन को भावुक कर गये..!
आप दोनों को हार्दिक बधाई!

~सादर!!!

shashi purwar said...

sundar tanka aur sadoka ...........bhavpurn abhivyakti

bhawna said...

भावपूर्ण अभिव्यक्ति