Saturday, July 20, 2013

हम इतना याद करें

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 
1
सजना का गोरी से
बाँध गई मनवा 
चाहत इक डोरी से ।
2
क्या फूल यहाँ महकें 
ज़हर हवाओं में 
पंछी कैसे चहकें ।
ये रात बहुत काली 
है कितना गाफिल 
इस बगिया का माली ।
4
गुलज़ार कतारें थीं 
ख़्वाब तभी टूटा 
जब पास बहारें थीं ।
5
रुख मोड़ लिया हमने 
कल की बातों को 
कल छोड़ दिया हमने ।
6
हर दिन अरदास करूँ 
कौन यहाँ, कान्हा !
मैं जिसकी आस करूँ ।
7
हम इतना याद करें 
रुकतीं  ना हिचकी 
वो फिर फ़रियाद करें

10 comments:

Subhash Chandra Lakhera said...

" रुख मोड़ लिया हमने / कल की बातों को / कल छोड़ दिया हमने।"
सभी माहिया बहुत खूबसूरत हैं और जीवन के विभिन्न पक्षों से जुड़े हुए हैं ! ज्योत्स्ना जी आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनायें !

Pushpa Mehra said...

kya phool yahaan mahaken, zahar hawaaon me.......,
ye raat bahut kaali hai..............,
rukh mod liyaa hamne...........

bahut sundar , Badhaai

pushpa mehra

Anita (अनिता) said...

वाह! बहुत खूबसूरत भाव लिए हुए माहिया...

~सादर!!!

Krishna said...

क्या फूल यहाँ महकें
ज़हर हवाओं में
पंछी कैसे चहकें ।
सभी माहिया बहुत सुन्दर...ज्योत्स्ना जी बधाई!

sushila said...

सभी माहिया बहुत खूबसूरत हैं ।ज्योत्स्ना जी आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनायें !

KAHI UNKAHI said...

क्या बात है...! सभी माहिया बहुत खूबसूरत हैं...| पर कुछ तो बहुत पसंद आए...जैसे ये...
गुलज़ार कतारें थीं
ख़्वाब तभी टूटा
जब पास बहारें थीं ।

और ये बहुत सकारात्मक है...
रुख मोड़ लिया हमने
कल की बातों को
कल छोड़ दिया हमने ।
बधाई...|

प्रियंका गुप्ता

ज्योति-कलश said...

aa Subhash Chandra Lakhera ji ,Pushpa Mehra ji , Anita ji , Krishna ji ,Sushila ji evam प्रियंका जी ...आपकी स्नेह और आशिष से भरी उपस्थिति के लिए ह्रदय से आभारी हूँ ...सदा इस सद्भाव की कामना है |

सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

Sunita Agarwal said...

wahh umda rachnaye ..gahre or sundar bhaw liye huye .. badhayi :)

Rachana said...

गुलज़ार कतारें थीं
ख़्वाब तभी टूटा
जब पास बहारें थीं ।
bahut gahti baat kahi hai sabhi ke bhav itne sunder hain ki kya kahen
badhai
rachana

ज्योति-कलश said...

Sunita Agarwal ji evam Rachana ji ..आपकी सुखद प्रतिक्रिया हेतु ह्रदय से आभार ..:))

सादर
ज्योत्स्ना शर्मा