Friday, March 8, 2013

नारी के रूप


1-अनिता ललित
1
बेटी लाडली,
सुख-सौभाग्य पूर्ण,
जब पधारे..
घर-आँगन खिले
महके फुलवारी !
2
बहना प्यारी
भैया पे जा वारी
हो निहाल
कलाई पे बाँध के
अटूट नेह-धागा !
3
राजकुमारी
अपने महल से
जब हो विदा
फुलवारी सिसके
माली छुप के रो
4
पिया के देस
जो पहुँचे सजनी
सहम जा!
नया घर, माहौल
सबको अपनाए !
5
भूले बचपन
समर्पित होकर,
कहलाए माँ
आँचल में समेटे
ममता की मिसाल!
6
नवजीवन
सृजन से वो पाती
माँ कहलाती
अपनी ममता से
हर दु:ख हरती !
-0-
2- सुशीला शिवराण
1
त्याग कुप्रथा
बेटियाँ नहीं जिंस
कर दीं दान
स्वामी-दासी संबंध
समाज का कलंक।
2
हर रूप में
स्‍त्री रहे समर्पिता
तेरी अस्मिता
कुछ दे प्रतिदान
सुन मनु
-संतान।
3
करे है सेवा
तन-मन-धन से
आज की नारी
पिसे घर-दफ़्तर

1 comment:

Anita (अनिता) said...

दिल को छूने वाली रचना...सुशीला जी !
~सादर!!!