Thursday, March 7, 2013

आज की नारी



डॉ सरस्वती माथुर
1
आज की नारी 
जलती है- अखंड-
दीप ज्योति -सी
स्नेह सदभाव की
रोशनी उड़ेलती I
2
सृक नारी
लुटाती है मुस्कानें
दर्द पीकर
 खुशियाँ बरसाती
भर कर उमंगें  
 3
बंदनवार
हमारे घर द्धार
सजी है नारी
जीवन- उत्सव में
प्रेम गीत बुनती I
4
एक झरना
है नारी की मुस्कान
इन्द्रधनुषी
उसकी पहचान,
चाहे- मान- सम्मान
5
चुप रह के
बोलती है नारी तो
पिंरे में भी
उन्मुक्त डोलती है
मिठास घोलती है
-0-

5 comments:

Krishna said...

चुप रह के
बोलती है नारी तो
पिंजरे में भी
उन्मुक्त डोलती है
मिठास घोलती है
बहुत सुन्दर ताँका सरस्वती जी बधाई।

-0-

Dr.Bhawna said...

चुप रह के
बोलती है नारी तो
पिंजरे में भी
उन्मुक्त डोलती है
मिठास घोलती है..

Naari par aapne bahut khule man se likha hai bahut achchhe bhaav lage aapke...bahut2 badhai...

Anju (Anu) Chaudhary said...

sarthak abhivyakti

सरिता भाटिया said...

sarthak bhav abhinandan
गुज़ारिश : ''महिला दिवस पर एक गुज़ारिश ''

KAHI UNKAHI said...

भावपूर्ण...बधाई...|