Friday, March 22, 2013

चहके बेटी



डॉ•सरस्वती माथुर
1
बेटी कोयल
घर माँ का बासंती
चहके बेटी
लगती रसवंती
भाग्य से है मिलती
2
सौन चिरैया
आई मेरी बगिया
ओ बिटिया तू
आँगन की चिड़िया
प्यारी मेरी  गुडिया  
3
बिटिया बोली-
माँ ! मधुमय तेरा
घर -आँगन
खेलूँगी छमछम
कर तेरा दर्शन
4
माँ का अँगना
छमछम डोलूँ मैं
बाबुल मेरे !
बताओ क्या बोलूँ मैं
जाना दूर, रो लूँ मैं ?
-0-

3 comments:

KAHI UNKAHI said...

माँ का अँगना
छमछम डोलूँ मैं
बाबुल मेरे !
बताओ क्या बोलूँ मैं
जाना दूर, रो लूँ मैं ?
बहुत मार्मिक...बधाई...|

Anita (अनिता) said...

रुला ही दिया...
क्यों बेटियों को दूर जाना पड़ता है... :(
~सादर!!!

Krishna said...

बहुत सुन्दर सेदोका...बधाई