Wednesday, March 20, 2013

मन की झील


डॉ भावना कुँअर
1

लहर आती
किनारों के कान में
चुपके -से ,हौले -से
जाने क्या-क्या
कहकर है जाती
है सबसे छिपाती।



2

किरणें आज
गुदगुदाती जाएँ
सागर के तन को
सूर्य बुलाए
मंद-मंद मुस्काएँ
वापस ही जाएँ।


3
मन की झील
शान्त थी बरसों से
कौन पथिक आया !
प्रेम-काँकर
फेंक इसमें,भागा
हाथ ही पाया।
4
वक्त ने मुझे
बेबस ऐसा किया-
जलाया था मैंने जो
प्रेम का दीया
छोटी -सी इस लौ ने
जीवन जला दिया।
5
तूने ही दिए
अनगिनत ख्वाब
मेरी इन आँखों में,
पर क्या किया?
ख्वाबों के संग-संग
बेरौनक हुई अँखियाँ ।
6
आँखों में एक
बसा था सुरूर- सा
चिंगारियों से भरा
एक अदद
है कौन कमज़र्फ
ये जहान दे गया।
7
सहेजे रखी
जो बरसों से मैंने
यादों की पिटारियाँ
अचानक यूँ
एक निकल भागी
जा माँ के गले लगी
8
मन की बात
है छिप जाती कभी
सर्दी की धूप-जैसी
लहरों -संग
उछल जाती कभी
नन्ही मछलियों- सी।
9
मन की बात
लिख पाए कोई
अठखेलियाँ करें
ये नटखट
चंचल लहरों -सी
ख्वाबों पे पहरे- सी।

10
दर पे मेरे
छोड़ी है किसने
दर्द भरी पोटली?
जादू भरी -सी
निकालूँ,थक जाऊँ
खत्म कर पाऊँ।
-0-

6 comments:

Krishna said...

दर पे मेरे
छोड़ी है किसने
दर्द भरी पोटली?
जादू भरी -सी
निकालूँ,थक जाऊँ
खत्म न कर पाऊँ।
सुन्दर भाव लिए सभी अर्थपूर्ण सेदोका।
लेकिन यह बहुत मन को छू गया। भावना जी बहुत बधाई।

-0-

ज्योति-कलश said...

sabhi sedoka bahut sundar ...gahre bhav bhare ...
किरणें आज
गुदगुदाती जाएँ
सागर के तन को
सूर्य बुलाए
मंद-मंद मुस्काएँ
वापस ही न जाएँ।....bahut sundar bimb ...badhaaii !!
saadar
jyotsna sharma

डॉ. जेन्नी शबनम said...

सभी सेदोका बहुत भावपूर्ण. ख़ास कर जादू-सी दर्द भरी पोटली...कभी ख़त्म नहीं होती. शुभकामनाएँ.

satishrajpushkarana said...

इस सेदोका की गहराई लाजवाब है-मन की बात
लिख न पाए कोई
अठखेलियाँ करें
ये नटखट
चंचल लहरों -सी
ख्वाबों पे पहरे- सी। अन्य सभी सेदोका भी भावपूर्ण हैं । आप सबने सेदोका को ऊँचाई प्रदान की है।

Dr.Bhawna said...

Aap sabhi ka dil se aabhaar...

KAHI UNKAHI said...

क्या बात है...! बहुत सुन्दर...| हार्दिक बधाई...|
प्रियंका'