Monday, March 25, 2013

जीवन के विविध रंग


डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
 1
वन्दना परगनिहा
अरे वसंत
कैसी करो ठिठोली
लिए घूमते
ये पवन निगोड़ी
अनहोनी न हो ले ।
 2
न मान करो
मेरे सखा वसंत
कहाँ बसाऊँ
तुम्हीं कहो तो ,मन
बसे हैं मेरे कन्त !
3
अरे फागुन
क्या गुनूँ तेरे गुन
सरस मन
गुनगुना ही उठे
रुत हुई मगन ।
4
सुनो रे पिया
अजब जादूगर
होरी मचाई
न रंग न गुलाल
हो गई मैं तो लाल ।
-0-
2-डॉ अनीता कपूर
1
हुई रंगीली
मन की रे पत्तियाँ
होली का वृक्ष
अब तो आओ कान्हा
मैं हुई राधा, मीरा  ।
2
भीगा मनवा
रहा सूखा तनवा
बाट निहारूँ
अब तो आओ कान्हा
राधा रूप हुई मैं
3
रंगो की बातें
सुनकर डोल गया
होली में मन
पुकार रही राधा
कान्हा का रूप  धरे
-0-
3-कृष्णा वर्मा
1
टूटा सयंम
रचा उत्सव फाग
प्रीत है अंध
है साँसों में कस्तूरी
फैल गई सुगंध।
2
बरसी प्रीत
रंगों भरी फुहार
फाग ले आया
टेसू गुलमोहर
वसुधा का शृंगार।
3
मौन अधर
आँखों-आँखों में बात
गुलमोहर
पलाश, गुलाब के
हुए रक्तिम हाथ।
4
रस भीने से
छंद कलम लिखे
मन-पन्नों पे
प्रीत रंग में रँगी
मौन गोरी लजीली।
5
स्मृति के रंग
ह्रदय पटल पे
खेले फाग
याद पिया की आए
सुलगे तन आग।
-0-
4 - मंजु गुप्ता 
1
प्यार का रंग 
चढ़ा तन - मन पे
स्पर्शों की वर्षा 
सपनों के नीड को 
आबाद करा गई .
-0-


5 comments:

Anupama Tripathi said...

बहुत भावपूर्ण और सुन्दर ....सभी रचनाएँ ....
आभार .

Manju Gupta said...

प्रेम के रंग में रंगे भावमय तांका होली मिलन को प्रगाढ़ कर रही है .

सभी को होली की शुभकामनाएँ .

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बहुत प्यारी रचनाएं ... आभार

Anita (अनिता) said...

बहुत ही खूबसूरत, भावपूर्ण रचनाएँ!
सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई!
~सादर!!!

ज्योति-कलश said...

aap sabhi ke prati hriday se aabhaar ....evam bahut shubh kaamanaayen !!
saadar
jyotsna sharma