Thursday, February 28, 2013

जीवन का आकाश


रचना श्रीवास्तव
1
भर ही  जाता
जीवन का आकाश
कभी रंगों से,
कभी बेनूर होता
ये खाली केनवास 
2
बहुत कुछ
कोरी किताब पर  
लिखना चाहा
हमने जब-जब
खत्म हो गई 
स्याही ।
3
इस जीवन
से कुछ नहीं  चाह
पर  न जाने
क्यों , बूँद-बूँद मेरी
उम्मीद पीता  गया  ।
4
उनके लिए 
यह जीवन होगा 

फूलों की सेज 
हमको तो सोने को
ज़मीन  भी न मिली  ।
5
ज़िन्दगी पर
लिखी थी नज़्म मैंने
महकती थी
पर अब उसके
शब्द ढहने लगे हैं ।
 -0-

7 comments:

Dr.Bhawna said...

भर ही जाता
जीवन का आकाश
कभी रंगों से,
कभी बेनूर होता
ये खाली केनवास ।

ज़िन्दगी पर
लिखी थी नज़्म मैंने
महकती थी
पर अब उसके
शब्द ढहने लगे हैं ।

Inke baare men kya kahun laga ki dil udelkar rakh diya bas...hardik badhai...

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति रचना जी,सादर आभार.

KAHI UNKAHI said...

बहुत कुछ
कोरी किताब पर
लिखना चाहा
हमने जब-जब
खत्म हो गई स्याही ।
बहुत खूबसूरत...बधाई...|

प्रियंका

Anita (अनिता) said...

बहुत सुंदर ज़िंदगी की किताब के चित्र...
~सुंदर ताँका !
हार्दिक बधाई.... रचना श्रीवास्तव जी:)!
~सादर!!!

sushila said...

ज़िंदगी की कशमकश को बहुत खूबसूरती से बयान करने के लिए रचना जी को बधाई !

Krishna said...

ज़िन्दगी पर
लिखी थी नज़्म मैंने
महकती थी
पर अब उसके
शब्द ढहने लगे हैं।
बहुत बढ़िया...रचना जी बधाई।

डॉ. जेन्नी शबनम said...

सभी ताँका बहुत भावपूर्ण ज़िंदगी-से...

ज़िन्दगी पर
लिखी थी नज़्म मैंने
महकती थी
पर अब उसके
शब्द ढहने लगे हैं ।

बहुत बधाई.