Thursday, February 21, 2013

जीवन का गणित


4-डॉ सरस्वती माथुर
1
समय -रथ
अनथक भागता
पाहुना बन
जीवन बसंत में
रगों को भरता है l
2
अब कहाँ है
जीवन निहारता ?
रोशन चाँद
अँधेरी सी रातों में
चाँदनी बरसाता l
-0-
5-मंजु गुप्ता 
1
नदी -स्याही से 
लिखे मन- धरा पे 
भाव -कलम  
जीवन को  जीने की 
रसवन्ती कहानी ।
2
फूल हैं झरे
सुबह से पहले 
सूनी दिशाएँ
राह भटक गई 
थी जीवन  की गाड़ी ।
3
रिश्ते पनपे 
तुमसे मिलकर 
निभा न सके 
किए हैं समझौते 
दिल जला-जला के ।
-0-
6-रेनु चन्द्रा माथुर
1
जीवन भर
दर्द सहते हुए
सीखा है मैने-
प्यार से बड़ा नहीं
होता है कोई रिश्ता ।
2
हमें सिखाता
जीवन का गणित
जोड़ें घटाएँ
गुणा करें या भाग
किस्मत का मिलता।
3
ये जीवन है
सुख- दु:ख का मेला
आना औ जाना
ना दिल को लगाना
मुस्कुराते रहना।
4
जीवन- नैया
तूफानों से घिरके
डगमगाती
साथी मिल जाए तो
फिर सँभल जाती।
-0-


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