Wednesday, February 6, 2013

नदिया चली


कृष्णा वर्मा

नदिया चली
जलधि से मिलने
व्याकुलमना
शिखर -चरण को
त्याग बावरी
गिरी वादी की गोद
अटकलों को
सहर्ष सहारती
प्रेम दीवानी
निज धुन में गाए
बहती जाए
दबे पाँव निर्घोष
कोमलांगिनी
पाहन चीरे नीर
क्षुब्ध न होती
अपितु सहलाके
दे सुमंत्रणा
बनी सद्व्यवहारी
बेखबर- सी
शीत ,धूप ,मेह से
सिक्त नेह से
सिन्धु की ये प्रेयसी
छूटे कगार
सम्बन्धहीन चली
पाने अतल प्यार ।
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