Monday, December 17, 2012

रिश्ते महकें


अनिता ललित
1
रिश्तों के पेड़,
मुस्कानों से खिलते,
मुरझा जाते
उदास आँसुओं से,
सूखते, मर जाते !
2
रिश्ते अमोल,
सँभालो जतन से,
सहेजो इन्हें,
जीवन की ये पूँजी,
लगातार बढ़ती !
3
रिश्ता अपना,
ज्यों धूप और छाँव,
थाम के हाथ...
सुख के साये चलें,
दुख की धूप तले।
4
रिश्तों की राह,
है बहुत कठिन,
रखना पाँव,
सँभल -सँभल के,
कोई दिल ना दुखे! 
5
रिश्ता दैवीय...
'माँ-पिता' का बच्चों से,
झेलें तूफान,
बन बच्चों की आड़,
करें जान क़ुर्बान !
6
रिश्ते महकें,
प्रेम- पवन संग,
घुले सुगंध
जीवन- बगिया में,
ज्यों महके संदल !
7
जब भी लेता,
जीवन अँगड़ाई,
रिश्ते बदलें,
लेकर करवट,
नये रूप ढलते !
8
ईश्वर मेरे !
हर कर्म में बसा,
रिश्ता हमारा
नहीं है मोहताज
किसी आडम्बर का !
9
आँखें बनाएँ
एक अनोखा रिश्ता,
दो दिलों बीच
बिन बोले, सुन लें,
मधुर प्रेम-गीत !
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6 comments:

sushila said...

सुंदर ताँका ।
"आँखें बनाएँ
एक अनोखा रिश्ता,
दो दिलों बीच,
बिन बोले, सुन लें,
मधुर प्रेम-गीत !"
बहुत सुंदर।

Krishna Verma said...

रिश्ते अमोल,
सँभालो जतन से,
सहेजो इन्हें,
जीवन की ये पूँजी,
लगातार बढ़ती !

बहुत सुन्दर ताँका बधाई।

Anita said...

आपका हार्दिक धन्यवाद... सुशीला जी व कृष्णा जी !:)
~सादर!!!

KAHI UNKAHI said...

रिश्तों के पेड़,
मुस्कानों से खिलते,
मुरझा जाते
उदास आँसुओं से,
सूखते, मर जाते !
सभी तांका बहुत अच्छे हैं, पर यह बहुत भाया...बधाई...|
प्रियंका

ज्योत्स्ना said...

रिश्तों को परिभाषित करते सुन्दर ताँका .....
आँखें बनाएँ
एक अनोखा रिश्ता,
दो दिलों बीच,
बिन बोले, सुन लें,
मधुर प्रेम-गीत !.....बहुत सुन्दर ...!!

Anita (अनिता) said...

कही अनकही जी, ज्योत्स्ना जी ... आप दोनों का हार्दिक धन्यवाद !!!:)
~सादर!!!