Tuesday, November 13, 2012

आँखों में दीप जले




1-
डॉ सरस्वती माथुर
1
आँखों में दीप जले
नभ के चंदा -सा
आ जाना शाम ढले 
2
दीपो में बाती है
यादो की पूनी
मैने भी काती है  ।
3
मन -चौरे दीप जले
तू भी आ जाना
जैसे ही शाम ढले  ।
4
खेतों में बाली है
तू भी आ जाना ।
सब ओर दिवाली है  ।
5
दीपक की झिलमिल है
काली रातों में
पूनम-सी महफ़िल है
6
घर -घर में दीप जले
काली रातों में
कैसे हम आज मिले ?
-0-
2-ज्योतिर्मयी पन्त
1
मन आशा- दीप जले
शुभ दिन आएगा
सबके दुख दर्द टलें ।
2
दीवाली आई है
जगमग दीप जलें
खुशहाली लाई है ।
-0-

3 comments:

Anonymous said...

Wah Bahut Sunder Mahiya !
SWATI

Vibha Rani Shrivastava said...

दीपक की झिलमिल है
काली रातों में
पूनम-सी महफ़िल है

बहुत सुन्दर ! माहिया उम्दा बनी है !!

Rajesh Kumari said...

बहुत प्यारे माहिया लिखे हैं डॉ . सरस्वती जी बहुत बहुत बधाई